previous arrow
next arrow
Slider
Home राज्य मध्यप्रदेश राजस्थान में बीजेपी अपनो में ही घिरी पड़ी, कांग्रेस से भी ज्यादा...

राजस्थान में बीजेपी अपनो में ही घिरी पड़ी, कांग्रेस से भी ज्यादा बुरे दौर की और बढ़ रही है

जयपुर। राजस्थान में बीजेपी आने वाले समय में बहुत बुरे दौर से गुजर सकती है इसका सबसे बड़ा कारण नेतृत्व को लेकर है इसको लेकर जबरदस्त घमासान चल रहा है यह तो बड़ी बड़ी पार्टी अपने स्तर पर अच्छे से काम कर लेती है नेता से लेकर कार्यकर्ता तक पार्टी को चलाने में एकजुटता दिखाते हैं परंतु काफी समय से बीजेपी मैं संगठन को लेकर जो चर्चाएं चल रही है उसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जिस तरीके से दरकिनार किया गया है उससे कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि बीजेपी मे कोई भी संतुष्ट नहीं है।

वही हाल ही में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकर्ताओं के बीच जिस तरीके से सोशल मीडिया पर सोशल जंग चल रही है उससे कहीं ना कहीं ऐसा लगता है कि बीजेपी का हाल कांग्रेस से भी बुरा होने वाला है। ऐसे यह बात उन दो पर ही नहीं लागू होती है और भी भाजपा के वरिष्ठ नेता है जो कि अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं उसमें राजेंद्र राठौड़ का नाम भी है तो राज्यवर्धन सिंह का नाम भी है गजेंद्र सिंह शेखावत जी अपने आप को कम नहीं आंक रहे हैं। बकायदा इन सभी नेताओं के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर पेज बना रखे है।

जिसमें भावी नेता या फिर भावी मुख्यमंत्री ऐसे कर्मठ कार्यकर्ता जैसे शब्दों का वर्णन किया गया है। हमेशा देखा गया है कि 2 की लड़ाई में तीसरे का फायदा होता है ऐसा ही कुछ शायद राजस्थान में भाजपा में हो सकता है कि 2 की लड़ाई में कोई तीसरा बाजी मार सकता है अब देखना यह है राजस्थान में जिस तरीके से भाजपा में दो टुकड़े दिख रहे हैं यह टुकड़े दो की जगह ज्यादा भी हो सकते हैं बात करें गजेंद्र सिंह शेखावत की तो केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मोदी सरकार में दूसरी बार मंत्री बने हैं 2018 के चुनाव में गजेंद्र सिंह शेखावत को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जा रहा था परंतु मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उनको नहीं बनने दिया हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में गजेंद्र सिंह शेखावत ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत सवा दो लाख से अधिक मतों से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी इसी का परिणाम था कि उन को मंत्री बनाया गया परंतु बैंक घोटाले में गजेंद्र सिंह शेखावत और उनकी पत्नी का नाम आने के बाद से उनके सभी सपने खत्म से हो गए हैं वह कोशिश कर रहे हैं कि अपने आप को फिर से मजबूत करें और केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रख सके शेखावत प्रधानमंत्री मोदी के काफी नजदीकी है इसलिए माना जा सकता है की पूनिया और राज्य की लड़ाई में शेखावत का नंबर शायद लग जाए।

बात करें पूर्व केंद्रीय मंत्री और जयपुर ग्रामीण से सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर की राज्यवर्धन सिंह राठौर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्यवर्धन 2013 में भाजपा ज्वाइन करी थी और 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जयपुर ग्रामीण से कांग्रेस के सीपी जोशी को हराकर जीत हासिल की थी इसके बाद उन्हें मोदी सरकार में मंत्री बनाया गया राज्यवर्धन सिंह राठौर के व्यवहार के चलते हैं उनसे काफी कार्यकर्ता परेशान थे इसके बाद माना यह जा रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी तक भी उनकी शिकायत पहुंची थी आजादी उनको 2019 के चुनाव में फिर से जयपुर ग्रामीण से टिकट मिल गया और उन्होंने कांग्रेस की कृष्णा पूनिया को अच्छे अंतरों से हराया था परंतु उन को मंत्री पद नहीं मिला वही जिस तरीके से राज्यवर्धन के काम करने का तरीका है उससे कुछ लोग प्रभावित हुए हैं तो कुछ लोग को लगता है कि वह अपने काम को कुछ अलग तरीके से करना चाहते हैं और यही कारण है वह काम पूरा नहीं हो पाता है जिससे जनता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है राज्यवर्धन सिंह राठौर जिस तरीके से वर्तमान में काम कर रहे हैं मनाए जा सकता है शायद उनका नंबर भी इस दौरान लग सकता है।

जब इन सब की ही बात हो रही है तो फिर राजेंद्र राठौर को कैसे भुला जा सकता है राजेंद्र राठौड़ सात बार के विधायक हैं भाजपा के अंदर उनकी बड़ी खबर है वर्तमान में राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष हैं और अपने काम को शानदार तरीके से कर रहे हैं राठौड़ का दबदबा संगठन से लेकर कार्यकर्ताओं तक फैला हुआ है वसुंधरा राजे के नजदीकी कहे जाने वाले राठौड़ जब हनुमान बेनीवाल के साथ दिखे तो माना जा रहा था कि शायद दोनों के बीच बातें नहीं होगी परंतु जैसे ही हनुमान बेनीवाल जब बीजेपी कार्यालय पहुंचे थे और एनडीए के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने की बात कही थी तो राठौड़ और बेनीवाल के बीच तकरीबन 15 मिनट से ज्यादा बात भी हुई थी अकेले में ऐसे में तुरुप का इक्का कहे जाने वाले राजेंद्र राठौड़ राठौड़ को केंद्रीय आलाकमान से शायद मौका मिल सकता है कहीं ना कहीं वसुंधरा राजे अगर मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट नहीं किया जाता है तो वह राठौड़ के नाम को आगे कर सकती हैं वैसे तो राठौड़ इसी के साथ नहीं है मौका मिलते ही पाला बदल लेते हैं पर राजस्थान भाजपा की कमान भले ही पूनिया के पास है लेकिन उनको भी केंद्र आलाकमान की मंजूरी लेकर आगे चलना पड़ता है और यही कारण है कि खुद डिसीजन नहीं ले सकते हैं ऐसे में अगर केंद्र आलाकमान राठौड़ पर अपना हाथ रख देता है तो शायद मामले कुछ और ही होंगे परंतु राठौड़ को भी पता है कि वह वसुंधरा राजे के बगैर अधूरे हैं इसलिए अगर उनको आगे किया जाता है तो सबसे पहले उनको वसुंधरा राजे को मनाना पड़ेगा।

भाजपा में मुख्यमंत्री के दावेदारों की सूची बहुत लंबी है इस सूची में एक और नाम है राजसमंद से सांसद और जयपुर राजघराने की पूर्व राजकुमारी दीया कुमारी की। या कुमारी युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाते हैं उन्होंने 2013 में भाजपा ज्वाइन की थी और 2013 में सवाई माधोपुर से आम सभा चुनाव लड़ा था जिसमें उन्होंने कांग्रेस के दानिश अबरार को भारी मतों से हराया था उसके बाद 2018 के चुनाव में उनका टिकट कट गया 2019 में उन्हें राजसमंद से लोकसभा का टिकट मिला उन्होंने भारी बहुमत से जीत हासिल की परंतु उनको केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई जगह नहीं मिली माना यह जा रहा है कि कुछ महीनों बाद मोदी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार होगा जिसने शायद दिय कुमारी को जगह मिल सकती है अगर उनको जगह मिलती है तो शायद उनका काम सांसद तक ही रहेगा और अगर उनको और कमाल नहीं मिलती है तो शायद एक और माना जा सकता है कि उनको 2023 के चुनाव में मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जा सकता है ऐसे में अब देखना यह है की राजस्थान में भाजपा क्या करेगी इधर केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी भी अपना हाथ आजमाए हैं वहीं केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी पूरी तरीके से अपने इलाके में कार्य कर रहे हैं जिससे प्रदेश में उनका नाम रहे भाजपा की लिस्ट काफी लंबी हो चुकी है और देखने की बात है कि आने वाला समय भाजपा के लिए कैसा होगा जिस तरीके से वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के कार्यकर्ताओं के बीच सोशल मीडिया पर लड़ाई चल रही है उसे कहीं ना कहीं भाजपा को एक बड़ा नुकसान होने को है मिला कर बात करें तो प्रदेश में भाजपा की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है अब निकाय चुनाव जो बचे हैं उसमें भाजपा क्या करेगी वहीं इसके साथ ही तीन उपचुनाव में भी भाजपा दांव पर है हालांकि दो जगह कांग्रेस की जीत पक्की है तो वहीं एक जगह भाजपा की जीत पक्की है परंतु हाल ही में किसान आंदोलन में राष्ट्र लोकतांत्रिक पार्टी ने अपने आप को एनडीए से अलग कर दिया है वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने तीनों जगह उपचुनाव में अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर ली है ऐसे में कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए संकट है। सुजानगढ़ से कांग्रेस के विधायक और मंत्री मास्टर भंवर लाल मेघवाल के निधन के बाद से ही चर्चा थी कि वहां पर आरएलपी अपना प्रत्याशी काट सकता है हालांकि कांग्रेस उनके परिवार से ही किसी को टिकट देगी परंतु जिस तरीके से आरएलपी ने मैदान में कूदकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है ऐसे में देखा जा सकता है चुनाव के अंदर ऊपर नीचे हो सकते हैं वही सहाड़ा से कांग्रेस विधायक रहे कैलाश त्रिवेदी के निधन के बाद खाली हुई सीट पर उनके परिवार से आधा दर्जन लोगों ने टिकट की दावेदारी पेश करी है त्रिवेदी के भाई और बेटे ने तो आमने सामने हो चुके हैं अगर कांग्रेस उनके परिवार से किसी एक जने को टिकट देती है तो भाजपा वहां पर खेल कर सकती है और उनके परिवार के दूसरे सदस्य को टिकट दे सकती है तो वहीं आरोपी भी इसी जुगाड़ में बैठी हुई है और मिला कर बात करें तो सहाड़ा विधानसभा के अंदर जो उपचुनाव होने हैं उसमें त्रिवेदी के परिवार के ही सदस्य आपस में चुनाव लड़ते दिखाई दे सकते हैं वही बात करें राजसमंद की तो विधायक और पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी के निधन के बाद वह सीट खाली हो चुकी है उनके परिवार से भी कोई खास नहीं है जो कि चुनाव लड़े इस पर भाजपा वही के किसी कार्यकर्ता को टिकट दे सकती है कांग्रेस भी वहां पर दमदार नेता को उतारने की तैयारी कर रही है वहां से राजपूत कैंडिडेट उतारने की बात कही है अब देखना यह है कि वहां पर क्या स्थिति बनती है।

हमारें अन्य चेनल देखने के लिए निचे दिए वाक्यों पर क्लिक करे
वीडयो चेनल, भीलवाड़ा समाचार,  सभी समाचारों के साथ नवीनतम जानकारियाँराष्ट्रीय खबरों के साथ जानकारियाँ, स्थानीय, धर्म, नवीनतम |

Most Popular