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Home राज्य मध्यप्रदेश विशेष रिपोर्ट : राहुल के दौरे ने गिराया सचिन का ग्राफ

विशेष रिपोर्ट : राहुल के दौरे ने गिराया सचिन का ग्राफ

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं युवा हृदय राहुल गांधी 12 व 13 फरवरी को राजस्थान की 2 दिन की यात्रा पर आकर चले गए इस दौरान उन्होंने कुछ किसान पंचायतों में हिस्सा लिया तथा एक ट्रैक्टर रैली में शरीक हुए। राहुल गांधी के दौरे को लेकर कयास बाजी के दौर चल रहे थे क्योंकि पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और उनके सहयोगियों की बगावत के बाद राहुल गांधी की यह पहली राजस्थान यात्रा थी। राहुल गांधी के बाल सखा के रूप में सचिन पायलट स्थापित नेता थे और माना जा रहा था कि बगावत के बाद उन्हें पार्टी में वापस लेना राहुल गांधी के कारण संभव हो पाया तथा भविष्य में उन्हें और उनके सहयोगियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी राहुल गांधी दिलवाएंगे।


लेकिन राहुल गांधी के दौरे में सचिन पायलट पूरी तरह अलग-थलग दिखे यात्रा के पहले दिन पीलीबंगा की पहली किसान पंचायत में वे भाषण नहीं दे पाए जबकि दूसरी पंचायत जो पदमपुर में हुई वहां प्रभारी महासचिव अजय माकन ने अपने स्थान पर पायलट को बोलने का मौका दिलाया। मंच पर पायलट की राहुल गांधी से दूरी रही जिसे सबने देखा। राहुल गांधी का पहले दिन विश्राम गंगानगर था पर पायलट पदमपुर की सभा के बाद जयपुर लौट गए तथा अगले दिन सुबह किशनगढ़ एयरपोर्ट पहुंचे।
यात्रा के दूसरे दिन किशनगढ़ एयरपोर्ट पर पायलट को लाइन में खड़े रहकर राहुल गांधी का स्वागत करना पड़ा बाद में रुपनगढ़ में वे राहुल गांधी के साथ ट्रैक्टर पर नहीं बैठ पाए। जबकि उनकी कोशिश बैठने की रही लेकिन उन्हें प्रभारी महामंत्री ने उतरने को कह दिया बाद में मकराना की सभा में उन्हें बोलने मात्र का मौका मिला।
राहुल गांधी इस यात्रा में राजनीतिक रूप से परिपक्व दिखे उन्होंने राजस्थान में चल रहे सत्ता संघर्ष को समझते हुए पायलट को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से ज्यादा तवज्जो नहीं दी। पर पायलट का काम तो तभी बनता जब उन्हें सार्वजनिक रूप से पहले जैसा मान सम्मान मिलता।
कुल मिलाकर राहुल गांधी के दौरे से यह संदेश गया कि राजस्थान में अशोक गहलोत और डोटासरा की जोड़ी कांग्रेस को चलाएगी तथा गहलोत को किसी तरह का कोई खतरा नहीं है राहुल गांधी भी वही सोचेंगे और करेंगे जो उन्हें अशोक गहलोत बताएंगे या दिखाएंगे।
इस दौरे के बाद सचिन पायलट के मीडिया मित्रों में भी खलबली मच गई है कि वह अब कैसे और किस झूठ के सहारे पायलट की नेतागिरी को हवा दे गे। पायलट के सहयोगी भी सोचने लगे हैं कि गहलोत और डोटासरा से संबंध सुधारे रखने में ही फायदा है वही पायलट के नजदीकी लोग सोच रहे हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार राजनीतिक नियुक्तियां और अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पायलट ज्यादा मददगार नहीं हो सकते। इसके अतिरिक्त प्रभारी महामंत्री अजय माकन के सामने भी साफ हो गया है कि राजस्थान में किस को ज्यादा महत्व देना है और राहुल गांधी राजस्थान के बारे में क्या सोचते है।


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