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भीलवाड़ा लोकसभा सीट पर प्रत्याशी को लेकर मंथन जारी, अब सप्ताहभर बाद नाम से पर्दा उठने की संभावना

राजेश जीनगर

भीलवाड़ा/सत्ता के सेमिफाइनल विधानसभा चुनावों के बाद अब “सत्ता का महासंग्राम” बताया जा रहा लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने शनिवार देरशाम प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर 195 सीटों पर नामों की घोषणा कर दी। जिसमें 15 नाम राजस्थान से है। लेकिन इस पहली सूची में भीलवाड़ा लोकसभा प्रत्याशी का नाम नहीं आने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है की आखिर पेंच कहां फंसा ? वहीं विधानसभा में अपनी सीट गंवाने वाली भारतीय जनता पार्टी अब लोकसभा में दुबारा अपनी प्रतिष्ठा दांव पर नहीं लगाएगी। इसलिए भीलवाड़ा सीट पर प्रत्याशी को लेकर मंथन जारी है और लगभग सप्ताहभर बाद नाम से पर्दा उठने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले ही कुछ नामों पर सुगबुगाहट शुरू हो गई है। जिसमें चंडीगढ़ से राज्यपाल रहे वीपी सिंह के करीबी माने जाने वाले भाजपा नेता और अधिवक्ता उम्मेदसिंह राठौड़, पूर्व जिलाध्यक्ष दामोदर अग्रवाल, पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर, नंदलाल गुर्जर, उमाशंकर पारीक सहित संघ के कुछ पदाधिकारियो के नाम की भी चर्चा है, जिसमें अब एक समाजसेवी महिला का नाम भी सामने आ रहा है। इन नामों के बीच हरिशेवा उदासीन आश्रम के महामंडलेश्वर हंसराम का नाम भी दौड़ में शामिल बताया जा रहा था। वहीं दूसरी ओर माना तो ये जा रहा है कि अब तक सर्वाधिक मतों से जीतने वाले सुभाषचन्द्र बहेड़िया के नाम पर मुहर लगना तय है। पार्टी में खिंचतान जैसी कोई बात नही है। भीलवाड़ा लोकसभा सीट को निर्विवाद व “ए-ग्रेड” की मानकर नाम लगभग फाइनन था, लेकिन सियासत के समीकरण ऐसे बदले कि भीलवाड़ा सीट पर लोकसभा प्रत्याशी के लिए नाम फंस गया। अब एक बार नए सिरे से भीलवाड़ा सीट पर मंथन शुरू हुआ है। सूत्रों के अनुसार, संगठन नेतृत्व ने अब तक के सर्वे और पिछले चुनावों के जीत के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए नाम लगभग फाइनल था, लेकिन संगठन के पास पिछले दिनों कुछ ऐसा फीडबैक गया जिससे संगठन को भीलवाड़ा सीट पर दोबारा चर्चा शुरू करनी पड़ी। अब एक बार फिर एक्सरसाइज हो रही है। जबकि उधर, कांग्रेस में अभी कोई नाम सामने नहीं आया है और ना ही किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है। जिन-जिन नेताओं के नाम सामने आ रहे है वो चुनाव लड़ने के मानस में नहीं हैं, ऐसा सुनने में आ रहा है।

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