राजेन्द्र बबलू पोखरना
कोटड़ी|स्मार्ट हलचल|बरसात के दौरान जर्जर घोषित हुए ब्लॉक के 10 विद्यालय मंगलवार से नजदीकी विद्यालय में शिफ्ट होकर संचालित किए जाएंगे। जिसके आदेश निदेशक बीकानेर व जिला अधिकारियों द्वारा जारी किए गए। विद्यालयों के शिफ्ट होने की सूचना मिलते ही ग्रामीण अभिभावक कस्बे के विद्यालय विहीन होने तथा नन्हे बालको के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने को लेकर अधिकारियों व जन प्रतिनिधियों पर दबाव बनाने में जुट गए है। प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत दिनों बरसात के दौरान झालावाड़ विद्यालय में हुए हादसे के बाद जिला कलेक्टर व उपखण्ड अधिकारी कोटड़ी द्वारा ब्लॉक के समस्त विद्यालयों की बारीकी से जांच की कराई। जिसमें दो स्तरीय जांच की विशेष टीम ने ब्लॉक की 10 राजकीय विद्यालय पूर्ण जर्जर बताई। कमेटी द्वारा भवनों की विशेष जांच के बाद रिपोर्ट जिला कलेक्टर के द्वारा राज्य सरकार को प्रेषित की गई। सरकार ने भी मामले को गम्भीर मानते हुए बालको के साथ किसी प्रकार की अनहोनी से बचाने को लेकर कस्बे के निजी मकान व सार्वजनिक स्थानों पर चलाने की पालना में पिछले 4 माह से विधिवत रूप से चलाए जा रहे थे। शिक्षा निदेशक बीकानेर के आदेश से जर्जर भवन निर्माण व मरम्मत नही होने तक पंचायत के नजदीकी विद्यालयों में शिफ्ट करने के आदेश जारी होने से अभिभावकों में खलबली मच गई। मंगलवार को शीतकालीन अवकाश के बाद पहले दिन से ही जर्जर भवन वाले विद्यालय के छात्र व स्टाफ शिफ्ट नजदीकी विद्यालय में 2 पारी में संचालित किए जाने के निर्देश संस्थाप्रधान व पंचायत के पीईओ को जारी किए गए है। ब्लॉक के 10 विद्यालयों के जर्जर भवन में राउमावि फलासेड को रासेड़ के राउमावि में शिफ्ट किया गया है। रासेड़ विद्यालय सुबह तथा फलासेड विद्यालय शाम की पारी में संचालित किया जाएगा। वही राउप्रावि कोदिया अब राउमावि रीठ में चलेगी। वही उप्रावि गणेशपुरा को राउमावि बिशनिया, राप्रावि दातड़ा छोटा को उमावि माताजीकाखेड़ा, प्रावि देवलीखेडा को उमावि किशनगढ़, उप्रावि रघुनाथपुरा को प्रावि किरोकाझुपडा, उप्रावि अमरतिया को उप्रावि पीथास, प्रावि केशरपुरा को प्रावि बंजारोकाझुपडा, प्रावि श्रीपुरा को प्रावि थला तथा प्रावि अमरतीया का झुपड़ा को उप्रावि को करेड में शिफ्ट किया गया है। मंगलवार से शिफ्ट विद्यालयों में संचालन के लिए सम्बन्धित संस्था प्रधान को पाबंद किया गया है। सरकार द्वारा विद्यालय भवन की सुरक्षा मापदण्ड के अनुसार मरम्मत व नवीन भवन निर्माण नही होने तक विद्यालयों को शिफ्ट विद्यालय में स्टाफ व बालको के साथ ही आवश्यक रिकॉर्ड के साथ शिफ्ट करने से गाँव मे ही संचालित विद्यालयों को अब दूर दराज के विद्यालयों में पहुचना होगा। उधर 2 से 4 किमी की दूरी तय कर बालको को कड़ाके की सर्दी के बावजूद पहली पारी में सुबह जल्दी व दूसरी पारी में देर शाम तक विद्यालय संचालन करना व शत प्रतिशत बालको का ठहराव चुनोती बन गया है। विद्यालय के दोहरे स्टाफ होने से अधिशेष अध्यापकों के जिम्मे ड्रापआउट, अनियमित व अनामांकित बालको को विद्यालय से जोड़ने के लिए लगाया जाएगा। परीक्षा नजदीक होने के कारण बालको की शत प्रतिशत उपस्थिति रखने, कोर्स पूरा करने को लेकर भी शिफ्ट विद्यालयो के संस्था प्रधान के लिए परेशानी में डाल दिया है। उधर, शिफ्ट विद्यालयों के ग्रामीण भी बालको को 2 से 4 किमी दूर भेजने को लेकर असमंजस में नजर आरहे है। वही कक्षा 1 से 5 के नन्हे बालको के लिए दूरी तय कर विद्यालयों तक पहुचना परेशानी का सबब बन गया है। ग्रामीण अभिभावक कस्बे के विद्यालय विहीन होने तथा बालको को 2 से 4 किमी दूर के विद्यालयों तक पहुचाने में होने वाली परेशानी के अलावा भविष्य के साथ खिलवाड़ को लेकर अधिकारियों व जनप्रतिनिधियो के द्वार पर दस्तक देते नजर आए।


