रोहित सोनी
आसींद। नेशनल हाईवे निर्माण के बीच रोजी-रोटी के संकट से जूझ रहे बुजुर्ग व्यापारी भंवर लाल रेगर के लिए राहत की उम्मीद जगी है। 25 वर्षों से किराने की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे भंवर लाल की समस्या पर अब प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता दिखाई देने लगी है। नेशनल हाईवे के 100 फीट चौड़ीकरण में दुकान का अधिकांश हिस्सा ROW में चला गया, जिसके बाद उनके पास मात्र 5×5 फीट की जगह शेष बची। इसी छोटी सी जगह पर दोबारा दुकान शुरू करने की तैयारी के बीच वहां ट्रांसफार्मर लगाने की योजना सामने आई, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहरा गया था। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने भी इसे मानवीय दृष्टिकोण से देखने की मांग उठाई। भंवर लाल रेगर ने जिला कलेक्टर व एसडीएम से मौके का निरीक्षण कर ट्रांसफार्मर को अन्यत्र स्थानांतरित करने की गुहार लगाई है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन द्वारा मामले की जांच कर उचित समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया है। यदि ट्रांसफार्मर को वैकल्पिक स्थान पर शिफ्ट किया जाता है, तो बुजुर्ग व्यापारी को अपनी दुकान फिर से शुरू करने का रास्ता मिल सकेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन वर्षों से मेहनत कर जीवन यापन कर रहे छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। अब सबकी नजरें प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं, जिससे एक बुजुर्ग की मेहनत और सम्मान दोनों सुरक्षित रह सकें।













