मुकेश खटीक
मंगरोप।कस्बे के माता का मंड में स्थित करीब 400 साल पुराने ऊला-सुला बालाजी धाम का जीर्णोद्धार कार्य शुरू हो गया है।प्रशासनिक उदासीनता के कारण सालों से लंबित इस कार्य को अब स्थानीय जागरूक युवाओं की पहल पर गति मिली है।
जनसहयोग से जुटाई 30 हजार की राशि
यह पुराना धार्मिक स्थल समय और उपेक्षा के चलते अपना अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच गया था। युवाओं ने इस धरोहर को बचाने का बीड़ा उठाया और अपनी श्रद्धा के अनुसार लगभग 30 हजार रुपए की राशि एकत्रित कर जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ किया।कार्य शुरू होते ही यह पहल एक जनआंदोलन का रूप लेने लगी।स्थानीय लोगों ने मार्बल,ईंटें और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री भेंट की।धीरे-धीरे ग्रामीण,सामाजिक कार्यकर्ता और भामाशाह भी सहयोग के लिए आगे आने लगे हैं।इस संबंध में स्थानीय सत्यनारायण किर ने बताया कि यह पहल कस्बे की पुरानी धरोहरों और सनातनी अवशेषों को बचाने के उद्देश्य से की गई है।मंगरोप कस्बे में ऐसे कई मंदिर हैं जो 400 साल से भी अधिक पुराने हैं और इनका धार्मिक के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्व भी है।
ग्रामीण बोले-प्रशासन से कई बार की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर कई
बार प्रशासन से मांग की गई थी,लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंततः युवाओं ने स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी संभाली।उनकी इस सकारात्मक सोच और प्रयास की अब हर ओर सराहना हो रही है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहल न केवल ऊला-सुला बालाजी मंदिर को संरक्षित कर रही है,बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कस्बे की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।इस अवसर पर महावीर सोमानी,राघव सोमानी,अनिल सोलंकी,भेरूलाल खटीक,रतन गुर्जर,जमनालाल किर,शंभू किर,भगवतीलाल किर,भेरूलाल किर,हरीश किर सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।


