मुकेश खटीक
मंगरोप।क्षेत्र की राजस्व व्यवस्था की जमीनी हकीकत मंगरोप में किसी से छिपी नहीं है।यहां पटवार भवन आज भी 57 साल पुराने महज 9×12 फीट के जर्जर कमरे में संचालित हो रहा है।इसी छोटे से कमरे के एक कोने में पटवारी तो दूसरी ओर गिरदावर बैठकर राजस्व संबंधी कार्य करने को मजबूर हैं।सीमित स्थान,जर्जर छत और असुविधाजनक व्यवस्था के चलते न सिर्फ कर्मचारियों बल्कि आमजन को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बताया गया है कि भू-अभिलेख निरीक्षण केंद्र भवन वर्ष 2010 में बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका था,लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक भवन को संबंधित विभाग को सुपुर्द ही नहीं किया गया।वर्षों तक उपयोग में नहीं आने के कारण यह भवन अब दुर्दशा का शिकार हो चुका है।उद्घाटन से पहले ही भवन की हालत जर्जर हो गई है, दीवारों में दरारें आ चुकी हैं और परिसर में झाड़ियां उग आई हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया भवन प्रशासनिक उदासीनता का शिकार हो गया।यदि समय रहते भवन का हस्तांतरण कर दिया जाता तो आज राजस्व कार्य सुचारू रूप से आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित हो सकता था।वहीं दूसरी ओर पटवार भवन की मौजूदा स्थिति किसी भी समय हादसे को न्योता दे सकती है।ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि भू-अभिलेख निरीक्षण केंद्र भवन को शीघ्र विभाग को सुपुर्द कर उपयोग में लिया जाए,साथ ही जर्जर पटवार भवन की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए,ताकि आमजन को राजस्व संबंधी कार्यों में राहत मिल सके।अब बड़ा सवाल यह है कि 57 साल पुराने जर्जर कमरे में व्यवस्था चलाने की मजबूरी आखिर कब तक बनी रहेगी अगर कोई हादसा हुआ तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।हमीरगढ़ तहसीलदार भंवरलाल सेन ने बताया कि संबंधित भवन के दृष्टिकरण एवं नवीनीकरण हेतु राजस्व मंडल को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।साथ ही हमीरगढ़ तहसील क्षेत्र में स्थित सभी पटवार भवनों के नवीनीकरण एवं दुरुस्तीकरण के संबंध में प्रतिवर्ष राजस्व मंडल को अवगत कराया जाता है।अब इस संबंध में राजस्व मंडल द्वारा निर्णय लिए जाने के पश्चात ही कार्य को सुनिश्चित किया जा सकेगा।













