दिलखुश मोटीस
सावर (अजमेर)@स्मार्ट हलचल|बिसलपुर बांध की ऊंचाई बढ़ाने के संभावित सरकारी प्रस्ताव पर अब सियासी पारा चढ़ गया है। जहाजपुर विधायक गोपीचन्द मीणा ने विधानसभा में विशेष उल्लेख प्रस्ताव के माध्यम से 68 गांवों के संभावित विस्थापन का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
विधायक मीणा ने सदन में स्पष्ट कहा कि यदि बांध की ऊंचाई बढ़ाई जाती है तो केकड़ी, देवली-उनियारा और जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र के करीब 50 से 60 गांव सीधे डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। धुंवाला, जीरा, हथोडिया, बालापुरा, गणेशपुरा, मोतीपुरा, गांगीथला, मुंशीपुरा, देवपुरा, कासीर, नापाखेड़ा सहित कई गांवों के हजारों परिवारों पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है।
“ऊंचाई नहीं, गहराई बढ़ाओ” – विधायक का सीधा सुझाव
विधायक ने सरकार को स्पष्ट विकल्प सुझाया—
बांध की ऊंचाई यथावत रखी जाए।
वर्षों से जमा गाद (सिल्ट) को आधुनिक तकनीक से हटाया जाए।
जल संरक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए बांध की गहराई बढ़ाई जाए।
उन्होंने कहा कि ऊंचाई बढ़ाने से कृषि भूमि, चरागाह और सामाजिक ढांचा पूरी तरह तहस-नहस हो जाएगा। हजारों परिवारों की आजीविका खत्म हो सकती है। ऐसे में सरकार को वैज्ञानिक और व्यवहारिक समाधान अपनाना चाहिए।
ब्राह्मणी नदी जोड़ने के प्रस्ताव का समर्थन
विधायक मीणा ने ब्राह्मणी नदी को बीसलपुर बांध से जोड़ने के प्रस्ताव का भी पुरजोर समर्थन किया। उनका तर्क है कि इससे बांध में पानी की निरंतर आवक बनी रहेगी और ऊंचाई बढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
धरने पर डटे ग्रामीण
उल्लेखनीय है कि बांध की भराव क्षमता बढ़ाने के विरोध में राष्ट्रीय विस्थापित संघर्ष समिति पिछले करीब दो माह से देवली तहसील कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी पैतृक जमीन और घर किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
अब सवाल यह है कि क्या सरकार हजारों ग्रामीणों की आशंकाओं को नजरअंदाज कर बांध की ऊंचाई बढ़ाने का निर्णय लेगी, या फिर विधायक के सुझाए वैज्ञानिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार करेगी?
यह मुद्दा केवल जल प्रबंधन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के अस्तित्व, संस्कृति और भविष्य का है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख तय करेगा कि विकास की धारा बहेगी या गांवों की बसावट डूबेगी।










