शिवराज बारवाल मीना
जयपुर/टोंक। स्मार्ट हलचल|राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्वाचन क्षेत्र सांगानेर इलाके की 87 कॉलोनियों के नियमन को लेकर संघर्ष तेज हो गया है। रविवार को संघर्ष समिति के बैनर तले श्रीराम मैरिज गार्डन, टोंक रोड गौशाला सांगानेर में आयोजित विशाल बैठक में कॉलोनियों की विकास समितियों के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुट होकर सरकार को कड़ा संदेश दिया।बैठक में निर्णय लिया गया कि 24 मार्च को सैकड़ों की संख्या में लोग मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय पहुंचकर ओएसडी को 5 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपेंगे। साथ ही सरकार से मांग की जाएगी कि 01 अप्रैल को न्यायालय में होने वाली सुनवाई में 87 कॉलोनियों के पक्ष में मजबूत पैरवी कर नियमन सुनिश्चित किया जाए।
*सरकार नहीं चेती तो होगा उग्र आंदोलन*
संघर्ष समिति ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए तो 01 अप्रैल के बाद बड़ा जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
*टोंक रोड सहित प्रमुख सड़कों पर जाम*
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सरकारी निवास का घेराव,
सांगानेर क्षेत्र में सीएम के कार्यक्रमों का बहिष्कार
चुनाव बहिष्कार तक का फैसला, हजारों परिवारों ने अपने आशियाने बचाने के लिए “मरता क्या नहीं करता” की भावना के साथ सड़क पर उतरने का संकल्प लिया है।
*40 साल पुरानी कॉलोनियों का सवाल*
संघर्ष समिति संयोजक गौरव सेनानी रामप्रसाद ढाका ने बताया कि ये कॉलोनियां पिछले 40 वर्षों से बसी हुई हैं, जिनमें 20,000 से अधिक परिवार और लाखों लोग निवास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये कॉलोनियां किसानों द्वारा भूमि बेचकर वैध रूप से बसाई गई हैं और इन्हें अवैध बताना उचित नहीं है।
*पहले भी शुरू हुई थी नियमन प्रक्रिया*
27 कॉलोनियों को पूर्व में राजस्थान आवासन मंडल द्वारा स्वीकृति, जयपुर विकास प्राधिकरण को नियमन का अधिकार, जुलाई 2025 में कैंप लगाने की घोषणा, लेकिन मार्च 2025 के एक विवादित आदेश के चलते पूरी प्रक्रिया अटक गई, जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
*सरकार पर आरोप*
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि सरकार जनभावनाओं को नजरअंदाज कर रही है और झूठे आश्वासनों के जरिए लोगों को शांत करने की कोशिश कर रही है।
*अंतिम चेतावनी*
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि ज्ञापन सरकार को जगाने का आखिरी प्रयास है, इसके बाद लाखों लोगों का सड़कों पर उतरना तय है, जो सरकार के लिए भारी पड़ सकता है। यह मामला अब केवल कॉलोनियों के नियमन का नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के आशियाने और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
