गांवों में तेज हुई पंचायत चुनाव की सरगर्मी, भेरूंदा पंचायत समिति में पहली बार 8 नए सरपंच बनेंगे
लुकमान शाह
स्मार्ट हलचल|क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पंचायत चुनाव की सरगर्मी अब अपने चरम पर पहुंच गई है। नागौर जिले के भेरूंदा पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली 31 ग्राम पंचायतों में इस बार मतदाता अपने नए सरपंच चुनेंगे। इस बार का चुनाव बेहद खास होने वाला है। क्योंकि क्षेत्र को 8 नए सरपंच मिलने जा रहे हैं।
निर्वाचन आयोग की नई व्यवस्था के तहत भेरूंदा क्षेत्र में पंचायतों का दायरा बदला गया है। विकास को गति देने और प्रशासनिक सुगमता के उद्देश्य से नई पंचायतों का सृजन किया गया है। मेहराणा ,गोठड़ा ,सुरपुरा ,बनवाड़ा,सनेडिया,मोरियाना,नृसिंह
बासनी,पिपलिया
इन 8 नई ग्राम पंचायतों में पहली बार स्वतंत्र सरपंच पद के लिए मतदान होगा, जिसे लेकर युवाओं और नए चेहरों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि लंबे इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक पंचायती राज व्यवस्था के चुनाव संपन्न करवाने है। इस प्रक्रिया में राज्य सरकार ने जिला परिषद व पंचायत समितियों का परिसीमन भी कर वार्डों की फाइनल सूची जारी कर दी है। अब अधिक आबादी वाली कई ग्राम पंचायतों में भी वार्डों की संख्या में फेरबदल कर संख्या बढ़ाई गई। इन वार्डों से चुने जाने वाले वार्ड पंच न केवल ग्राम पंचायत की सरकार का हिस्सा बनेंगे, बल्कि भविष्य में सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य जैसी बड़ी जिम्मेदारियां निभाकर राजनीति की दिशा भी तय करेंगे।
*आरक्षण की लॉटरी पर टिकी नजरें*
वार्डों की घोषणा के साथ ही गांव गांव में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ गई है। हालांकि अभी निर्वाचन विभाग द्वारा आरक्षण के आधार पर सीटों का निर्धारण किया जाना बाकी है। सामान्य, सामान्य महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों की लॉटरी निकलेगी। इसी लॉटरी पर कई दावेदारों की राजनीतिक उम्मीदें टिकी हुई है। हालांकि सरपंच पद के लिए लॉटरी नहीं आने तक सरपंची के दावेदार चुप्पी साधे हुए है।
*पंचायती राज चुनावः फैक्ट फाइल*
2011 की जनगणना और प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार
भेरूंदा पंचायत समिति ग्रामीण जनसंख्याः 1 लाख 23 हजार
कुल ग्राम पंचायतः 31
नई ग्राम पंचायते बनीः8
समिति में ग्राम पंचायतें पुर्नगठित हुई : 23
*चौपालों से चाय की दुकानों तक चुनावी चर्चा*
गांवों में अब चौपालों, चाय की दुकानों और खेत-खलिहानों तक पंचायत चुनाव की चर्चा आम हो चुकी है। कौन किस वार्ड से मैदान में उतरेगा, किसे किस वर्ग का समर्थन मिलेगा और कौन नए चेहरे राजनीति में कदम रखेंगे इन सवालों पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। चुनाव को लेकर ग्रामीण सियासत ने रफ्तार पकड़ ली है और आने वाले पंचायत चुनाव गांवों की राजनीति में नई दिशा तय करेंगे।
इस बार वार्डों का निर्धारण पूरी तरह जनसंख्या के अनुपात में किया गया है। जिन ग्राम पंचायतों की आबादी तीन हजार तक है वहां सात वार्ड बनाए गए हैं। इसके बाद प्रति एक हजार की आबादी बढ़ने पर दो-दो वार्ड बढ़ाए गए है। यानी तीन से चार हजार की आबादी वाली पंचायतों में 9 वार्ड, और आगे इसी अनुपात में 11, 13, 15 व उससे अधिक वार्ड तय किए गए हैं। इससे हर पंचायत में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है। भेरूंदा पंचायत समिति में ग्रामीण जनसंख्या 1 लाख 23हजार है, उसी के अनुपात में वार्ड का निधारण किया गया है।
-:सहायक विकास अधिकारी नन्दकिशोर टाक

