टोंक में नशे पर कार्रवाई के बीच बड़ा सवाल-अलीगढ़ थाना क्षेत्र में क्यों पनप रहा अवैध कारोबार?

4 किलो गांजा व 30 पौधे जब्त-बाईक सहित एक आरोपी गिरफ्तार-डीएसटी की ताबड़तोड़ कार्रवाई से स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

शिवराज बारवाल मीना
टोंक/अलीगढ़। स्मार्ट हलचल|जिले में जिला पुलिस अधीक्षक टोंक राजेश कुमार मीणा के निर्देश पर नशे के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए अलीगढ़ थाना क्षेत्र के चोरू में शुक्रवार को 4 किलो गांजा व 30 गांजे के पौधे जब्त कर बाईक के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्यवाही जिला स्पेशल टीम के प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी (उप निरीक्षक) नेतृत्व में मय डीएसटी टीम में शामिल राधामोहन कांस्टेबल 70, राधाकिशन कांस्टेबल 921, राजेश कांस्टेबल 981, प्रधान कांस्टेबल 734, शिवपाल कांस्टेबल 206, रूकमकेश कांस्टेबल 154 तथा पुलिस थाना अलीगढ़ की टीम मौजूद रही। डीएसटी टीम द्वारा यह कार्यवाही अलीगढ़ थाना पुलिस के साथ संयुक्त रूप से बताई गई हैं। अलीगढ़ पुलिस थाने में आरोपी पप्पूलाल मीणा (40) निवासी रिज़ोदा के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
*डीएसटी की कार्यवाही से स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर उठते सवाल*
जहां एक ओर यह कार्रवाई डीएसटी पुलिस की उपलब्धि मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर अलीगढ़ थाना क्षेत्र में बढ़ती अवैध गतिविधियों और नशाखोरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी पप्पूलाल मीणा (40) निवासी रिज़ोदा थाना अलीगढ़ जिला टोंक द्वारा लंबे समय से अपने खेत में अवैध रूप से गांजे की खेती कर रहा था और नियमित रूप से सप्लाई का काम भी कर रहा था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि थाना क्षेत्र में आसूचना अधिकारी, बीट अधिकारी, बीट प्रभारी, नियमित पुलिस गश्त और सर्किल गश्त के बावजूद भी यह अवैध गतिविधियां आखिर स्थानीय पुलिस को नजर क्यों नहीं आईं? स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में न केवल मादक पदार्थों की बिक्री, बल्कि जुआ-सट्टा, अवैध शराब बिक्री, अवैध खनन व परिवहन जैसी गतिविधियां भी खुलेआम पनप रही हैं। इसके साथ ही चोरी व अन्य आपराधिक घटनाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आमजन में भय और असुरक्षा का माहौल है। खास बात यह है कि जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) टोंक द्वारा लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाईयां की जा रही हैं और कई मामलों का खुलासा किया जा रहा है, जबकि स्थानीय अलीगढ़ थाना पुलिस के स्तर पर ऐसी सक्रियता नजर नहीं आ रही। ऐसे में यह धारणा मजबूत हो रही है कि क्षेत्र में चल रही अवैध गतिविधियां स्थानीय पुलिस की नजर से दूर हैं या फिर उन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। डीएसटी की लगातार सफल कार्रवाइयों ने जहां अपराधियों में हड़कंप मचाया है, वहीं अलीगढ़ थाना पुलिस की कार्यशैली को भी संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। अब जरूरत इस बात की है कि स्थानीय पुलिस अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाए, खुफिया तंत्र को मजबूत करे और बीट व्यवस्था व गश्त को प्रभावी बनाकर अवैध गतिविधियों पर सख्ती से अंकुश लगाए। क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे।