न्यूयॉर्क।स्मार्ट हलचल|संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में भारत की उप स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत योजना पटेल ने ‘समुद्री क्षेत्र में जलमार्गों की सुरक्षा और संरक्षण’ पर आयोजित खुली बहस के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है।
उन्होंने वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाने वाली कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया और कहा कि जलमार्गों में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक है। राजदूत ने “मुक्त, खुले और नियम-आधारित” समुद्री आदेश के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जलमार्ग वैश्विक वाणिज्य की जीवन रेखा हैं और इन्हें किसी भी देश द्वारा हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन ने भारतीय राजनयिक के बयान की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा की है, जिसमें समुद्री सुरक्षा को एक साझा वैश्विक चुनौती बताते हुए राजनयिक पटेल ने स्पष्ट किया पायरेसी, आतंकवाद और समुद्री विवादों से निपटने के लिए वास्तविक अंतरराष्ट्रीय सहयोग अनिवार्य है।
उन्होंने रेखांकित किया कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ (शुद्ध सुरक्षा प्रदाता) के रूप में कार्य कर रहा है और आपदा राहत (एचएडीआर) व खोज एवं बचाव कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाता है। पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व में दिए गए पांच सिद्धांतों पर भी जोर दिया, जिनमें बाधा रहित समुद्री व्यापार, विवादों का शांतिपूर्ण समाधान और समुद्री पर्यावरण का संरक्षण शामिल है।
इससे पहले भी भारत ने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से यूएनसीएलओएस (समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन) के अनुरूप ‘मुक्त, खुले और नियम-आधारित’ समुद्री व्यवस्था का आह्वान किया है। भारत का मानना है कि समुद्र में सुरक्षित मार्ग वैश्विक समृद्धि के लिए रीढ़ की हड्डी हैं। हाल ही में यूएन की एक अन्य उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान भी भारत ने पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा पर जोर दिया था।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)
