बागोर के ठाकुरजी चारभुजा नाथ तुलछा माता संग लिए फेरे
सम्मेलन में मेवाड़ संभाग सहित प्रदेश भर से माली समाज के सेकंडों लोग हुऐ शामिल
गुरलां । माली समाज के सामुहिक विवाह सम्मेलन मे 18 जोड़े ने थामा विवाह सम्मेलन में हाथ। चारभुजा जी तुलछा माता सहित वर वधु की घोड़ों व बग्घी पर निकली बन्दोली। शोभायात्रा में बराती व सम्मेलन आयोजक सजे धजे बैण्ड बाजा पर नाचते हुए शोभायात्रा में शामिल हुए। उपनगर पुर में घाटी के बालाजी के गुरूवार को माली समाज का चतुर्थ सामूहिक विवाह सम्मेलन धूमधाम से आयोजित हुआ। जिसमें माली समाज के 18 जोड़े रीति रिवाज के साथ परिणय-सूत्र में बंधे। शोभायात्रा में बग्गी, घोड़े का लवाजमा साथ चल रहा था। ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर चारभुजा नाथ व वर वधुओ का स्वागत किया। लोग गीतों पर नाचते हुए चल रहे थे। विवाह स्थल पर पहुंचने पर दूल्हों ने तोरण की रस्म निभाई। विवाह पांडाल में बने मंच पर दूल्हों- दुल्हनों ने एक-दूसरों को वरमाला पहनाई। पंडित अशोक कुमार व्यास के मुखारबिंद से मंत्रोंचार शुभ मुहूर्त में अग्नि के समक्ष सात वचनों के साथ फैरे लिए। समय-समय पर ऐसे आयोजन समाज की एकजुटता के लिए जरूरी हैं। राजनैतिक प्रतिस्पर्धा के लिए शिक्षा जरूरी है। शिक्षा के अभाव में समाज मे सामाजिक और आर्थिक विकास की गति धीमी रहती है। आज माली समाज शांति प्रिय व अन्य समाज के श्रद्धा योग्य हो गया है। इस अवसर पर सामूहिक विवाह समिति के सचिव शंकरलाल गोयल, संरक्षक रामस्वरूप माली,भंवर सतरावला, कैलाश नुईवाल, प्रभुलाल नुईवाल, लालचंद माली, नानूराम गोयल, जगदीश ढिबरिया, बंशीलाल माली, कैलाश माली, भवानीराम माली, नारायण कनवासिया, कन्हैयालाल बुलिवाल, रमेश माली, भैरूलाल माली, रामस्वरूप् माली, मूलचंद छुलिवाल, मदन गहलोत, गोपाल माली, जगदीश गोयल, गणपत महावर, बद्रीलाल माली सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे।
