स्मार्ट हलचल। चित्तौड़गढ़। जिले में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीद केंद्रों की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। पंजीकृत किसानों के मुकाबले खरीद का लक्ष्य ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रहा है। भारतीय किसान संघ के कार्यकर्ताओं ने खरीद केंद्रों का जायजा लिया और किसानों की समस्याओं को उजागर किया।
बारदाने की कमी से किसानों में भारी आक्रोश
जिले के अधिकतर खरीद केंद्रों पर पंजीकृत किसानों की संख्या काफी बड़ी है, लेकिन अब तक मात्र 25 से 30 प्रतिशत किसानों की उपज का ही तौल हो सका है। शेष किसान अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और उन्हें यह डर सता रहा है कि खरीद क्षमता पूर्ण होने पर उनकी उपज का क्या होगा। सबसे बड़ी समस्या बारदाने (खाली बोरी) की है। किसानों को तौल का संदेश तो मिल जाता है, लेकिन केंद्र पर पहुंचने के बाद बारदाना खत्म होने का हवाला देकर उन्हें तपती धूप में अपनी उपज के साथ कई दिनों तक इंतजार करवाया जा रहा है।
भारतीय किसान संघ की प्रमुख मांगें व चेतावनी
किसानों की इस दुर्दशा को लेकर भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधि मंडल ने कई तहसीलों में उपखंड अधिकारियों को अवगत कराया है। संगठन ने सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- क्षमता बढ़ाई जाए: गेहूं और चना खरीद केंद्रों की क्षमता बढ़ाकर सभी पंजीकृत किसानों की उपज का तौल सुनिश्चित किया जाए।
- नियमित मॉनिटरिंग: सभी सरकारी खरीद केंद्रों की निगरानी कर बारदाने की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
- आंदोलन की चेतावनी: यदि सरकार खरीद क्षमता नहीं बढ़ाती है और व्यवस्था में सुधार नहीं होता है, तो भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
