रणवीर सिंह चौहान
स्मार्ट हलचल/अत्यंत दुख में जब शोक स्तब्ध कुछ भी समझ पाना असंभव सा हो ऐसे में परोपकार के लिए निर्णय करना ही मानवता है, परिवार पर दुख का पहाड़ हो और ऐसे में परिवार के द्वारा दो नेत्रहीनो के जीवन को रोशनी देने हेतु लिए गए नेत्रदान के साहसिक निर्णय की पूरे नगर में सराहना हो रही है।
भारत विकास परिषद एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के नेत्रदान संयोजक कमलेश गुप्ता दलाल ने बताया कि, अनाज व्यापारी रामगोपाल पालीवाल मंगलवार को किसी विवाह समारोह के लिए मोटरसाइकिल से रायपुर के लिए जा रहे थे, रास्ते में दुर्घटनाग्रस्त होने पर उनके सिर पर गंभीर चोट लगी एवं उनको राजकीय चिकित्सालय भवानीमंडी और वहां से एसआरजी हॉस्पिटल झालावाड़ ले जाया गया, लेकिन तीन दिन तक चिकित्सकीय प्रयास के बाद भी शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया, यह अप्रत्याशित समाचार पूरे परिवार के लिए अत्यधिक सदमा भरा था परंतु पुत्र योगेश पालीवाल ने साहस का परिचय देते हुए अपनी माता कन्या बाई, काका पुरुषोत्तम पालीवाल और बहन रजनी पालीवाल से पिता के नेत्रदान के लिए चर्चा की, योगेश पालीवाल पहले से भवानीमंडी के नेत्रदान कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं, ऐसे में परिवार की स्वीकृति मिलने के बाद समाजसेवी गोविंद गुप्ता के द्वारा सूचना पर कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन व ईबीएसआर बीबीजे चैप्टर की टीम ने ज्योति-रथ से झालावाड़ पहुंचकर उपस्थित परिवारजनों के सामने नेत्रदान प्रक्रिया संपादित करके कॉर्निया प्राप्त किया।
गर्मी में नेत्रदान के लिए समय कम उपलब्ध हो पाता है ऐसे में परिवार के द्वारा नेत्रदान प्रक्रिया को झालावाड़ में ही संपादित करवाने का निर्णय लिया गया, एवं नेत्रदान प्रक्रिया के बाद पोस्टमार्टम हुआ तथा उसके बाद परिवारजन पार्थिव शरीर को लेकर लगभग 2 घंटे विलंब से भवानीमंडी लौटे। नेत्रदान प्रक्रिया में प्रदीप, दिलीप, संजय पालीवाल आदि ने सहयोग किया।
डॉ कुलवंत गौड़ के अनुसार नेत्रदानी रामगोपाल पालीवाल का कॉर्निया अच्छा पाया गया है, जिसे आई बैंक जयपुर भिजवा दिया गया है जहां यह दो असहाय नेत्रहीनों को नई ज्योति प्रदान कर सकेगा।
कमलेश गुप्ता दलाल के अनुसार यह भवानीमंडी नगर से 157 वां नेत्रदान है।
