भीलवाड़ा/मदर्स डे के पावन अवसर पर जहां एक ओर मातृत्व, ममता और संवेदनाओं का उत्सव मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर जैन युवा सेवा संस्थान ने गौ माता, मूक पशु-पक्षियों एवं जीवमात्र के प्रति करुणा, सेवा और संरक्षण का अद्वितीय संदेश देकर मानवता की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की। रविवार को भीलवाड़ा-कोटा रोड स्थित यश विहार में आयोजित भव्य कार्यक्रम में संस्थान द्वारा 1008 सीमेंटेड पानी की टंकियों एवं गौ-ग्रास पात्रों का निःशुल्क वितरण कर जीवदया का ऐतिहासिक अभियान संचालित किया गया। संस्थान के अध्यक्ष धर्मीचंद बाफना एवं महामंत्री पीयूष खमेसरा ने जानकारी देते हुए बताया कि भीषण गर्मी में प्यास से व्याकुल गौवंश, पशु-पक्षियों और निराश्रित जीवों की पीड़ा को महसूस करते हुए यह सेवा यज्ञ आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल टंकियों के वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति में निहित दया, करुणा, सह-अस्तित्व और मातृत्व के भाव का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक नवकार महामंत्र के मंगलाचरण हुआ। मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा थे। विशिष्ट अतिथियों में लोक अदालत सदस्य शांतिलाल जैन, शांति भवन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद चीपड़, ओमप्रकाश सिसोदिया, लक्ष्मण सिंह बाबेल, दिनेश गोखरू,सुशील चपलोत,बाबू लाल टांक,कमला चौधरी,शकुंतला खमेसरा, साधना भंडारी,किरण बाफना, राखी खमेसरा एवं निर्मला बुलिया उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नाहर सिंह खारीवाल ने की। संस्थान के मार्गदर्शक भूपेंद्र सिंह पगारिया, संरक्षक अनिल खटोड़ एवं प्रमोद सिंघवी, उपाध्यक्ष ललित लोढ़ा तथा संस्थान के सदस्यों ने सभी अतिथियों एवं सहयोग प्रदान करने वाले भामाशाह दानदाताओं का मोमेंटो एवं दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया। प्रमोद सिंघवी एवं धर्मीचंद बाफना ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवदया जैन संस्कृति का मूल प्राण है। जल सेवा और गौ सेवा केवल पुण्य अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के प्रति आत्मीयता, दायित्व और संवेदना का भाव है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में एक छोटी सी पानी की टंकी भी असंख्य मूक जीवों के लिए जीवनदान सिद्ध हो सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने संस्थान द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति, संवेदना और कृषि परंपरा की आधारशिला हैं। सभी अतिथियों ने एक स्वर में गौ माता को “राष्ट्रीय माता” का दर्जा दिए जाने की मांग सरकार एवं प्रशासन से की। महामंत्री पीयूष खमेसरा व उपाध्यक्ष ललित लोढ़ा ने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर आने वाले लोगों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। छाया हेतु विशाल टेंट लगाए गए तथा प्यास बुझाने के लिए छाछ एवं चाय की सेवा निरंतर संचालित होती रही। संस्थान के मार्गदर्शक भूपेंद्र सिंह पगांरिया ने अपने संबोधन में कहा कि जब समाज सेवा, धर्म और संवेदना एक साथ जुड़ते हैं, तब ऐसे आयोजन इतिहास बन जाते हैं। उन्होंने संस्थान द्वारा संचालित विभिन्न जनसेवा एवं जीवदया गतिविधियों का विस्तृत विवेचन करते हुए सभी कार्यकर्ताओं की समर्पित भावना की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान संस्थान के सलाहकार पद पर धर्मचंद नंदावत की घोषणा की गई इस दौरान विशेष सम्मान नारायण भड़ाला का किया गया। कार्यक्रम के संयोजक गौरव तातेड़, सचिन चपलोत, मनोज खारीवाल, अभिषेक तातेड, प्रियंक भानावत, जितेंद्र सुराणा, संदीप लोढ़ा, टीकम खारीवाल, सुनील आंचलिया एवं दिलीप रांका सहित संस्थान के सभी सदस्यों ने लंबे समय से अथक प्रयास कर इस विशाल आयोजन को सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मदर्स डे पर आयोजित यह सेवा अभियान केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवमात्र के प्रति करुणा, संरक्षण और सह-अस्तित्व की भारतीय संस्कृति को सशक्त करने वाला प्रेरणादायी अध्याय बन गया। इस दौरान हेमेंद्र शर्मा,सुशील चपलोत,हुकमीचंद खटोड़, दिनेश खरवड़, ललित सांखला, गोवर्धन सिंह कावड़िया,अरविंद झामड़,नरेंद्र भंडारी, पंकज खारिवाल, अनिल बापना, सौरभ जैन, संदीप रांका, विपिन दुग्गड, महावीर बाफना, नरेंद्र डागा, मुकेश आंचलिया, पवन लोढ़ा, अंकित पगारिया,सहित वरिष्ठ समाजजन मौजूद थे
