5वीं तक मान्यता, लेकिन 8वीं तक पढ़ाई:जांच करने पहुंचे मीडिया कर्मी से धक्का-मुक्की,मोबाइल छीनने का प्रयास

मंगरोप@मुकेश खटीक।कस्बे में निजी विद्यालयों द्वारा नियमों को ताक में रखकर अवैध रूप से उच्च कक्षाओं का संचालन करने का मामला सामने आया है।यहां एक निजी विद्यालय को केवल 5वीं तक की मान्यता होने के बावजूद 8वीं तक की कक्षाएं संचालित करते पाया गया।सोमवार को मामले की पड़ताल करने पहुंचे मीडिया कर्मी के साथ विद्यालय संचालिका और उसके बेटे द्वारा अभद्रता,धक्का-मुक्की एवं मोबाइल छीनने का प्रयास किए जाने का भी आरोप है।वहीं जांच में फर्जी नामांकन और दूसरे स्कूलों में नाम चलाने के बदले मोटी रकम वसूलने जैसे गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार मंगरोप कस्बे स्थित गोडेस बाल विकास प्राथमिक विद्यालय को केवल 5वीं तक की मान्यता प्राप्त है,लेकिन विद्यालय प्रबंधन द्वारा नियमों के विपरीत 6वीं से 8वीं तक की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं।शिक्षा विभाग के नियमानुसार जिस विद्यालय को जितनी कक्षाओं तक मान्यता प्राप्त होती है,वह केवल उतनी ही कक्षाओं का संचालन कर सकता है।इसके बावजूद विद्यालय में उच्च कक्षाओं का संचालन खुलेआम किया जा रहा था।
मामले की पुष्टि और तथ्य जुटाने के लिए जब मीडिया कर्मी विद्यालय पहुंचा और 7वीं कक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों के फोटो लेने लगा,तभी विद्यालय संचालिका और उसके बेटे ने विरोध शुरू कर दिया।आरोप है कि दोनों ने मोबाइल छीनने का प्रयास करते हुए मीडिया कर्मी के साथ धक्का-मुक्की की तथा शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारियों से जान पहचान की धौंस दिखाकर विद्यालय परिसर से बाहर निकाल दिया।इतना ही नहीं,जाते समय यह भी कहा गया कि“अब जब भी विद्यालय में प्रवेश करना हो तो जिला शिक्षा अधिकारी से अनुमति लेकर आना।”
मामले की जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।कस्बे की छात्रा प्रांजल मारू वास्तविक रूप से गोडेस बाल विकास प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत है,जबकि उसका नामांकन भीलवाड़ा शहर स्थित निजी विद्यालय ज्ञानदीप विद्या मंदिर,कांवा का खेड़ा में चल रहा है।इस संबंध में जानकारी लेने के लिए जब ज्ञानदीप विद्या मंदिर की संचालिका मधु मारू से संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले फोन रिसीव किया।छात्रा के बारे में पूछताछ और मीडिया कर्मी द्वारा अपना परिचय देने के बाद संचालिका ने तुरंत फोन काट दिया।बाद में संबंधित नंबर को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया,जिससे दोबारा संपर्क नहीं हो सका।
स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने पर यह भी सामने आया कि कई मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय दूसरे स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का अपने यहां नाम चलाने के बदले तीन से चार हजार रुपए तक वसूल रहे हैं।सूत्रों के अनुसार यह खेल केवल एक-दो विद्यालयों तक सीमित नहीं है,बल्कि गांवों और शहरों के कई नामचीन निजी विद्यालयों तक फैला हुआ है।इससे शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और विद्यार्थियों के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इधर मामले की सूचना मिलने पर मंगरोप पीईईओ राजेश वैष्णव मौके पर पहुंचे।उन्होंने बताया कि जांच के दौरान गोडेस बाल विकास प्राथमिक विद्यालय में अनैतिक रूप से 8वीं तक कक्षाओं का संचालन पाया गया है।उन्होंने कहा कि विद्यालय को जल्द ही लिखित नोटिस जारी कर जवाब तलब किया जाएगा तथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।