जयपुर । राजस्थान में पिछले डेढ़ साल से अटके पंचायत और शहरी निकाय चुनावों को लेकर आज हाई कोर्ट में बेहद तीखी और निर्णायक सुनवाई हुई। राज्य सरकार द्वारा दिसंबर से पहले चुनाव कराने में असमर्थता जताने पर अदालत ने सख्त नाराजगी व्यक्त की। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की खंडपीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित (रिजर्व) रख लिया है।
*इस महत्वपूर्ण सुनवाई के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं*
*1.गर्मी का बहाना खारिज*
राज्य सरकार के महाधिवक्ता (AG) राजेंद्र प्रसाद ने दलील दी कि जून की भीषण तपिश और जुलाई के मानसून के कारण दिसंबर से पहले चुनाव संभव नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की, “राजस्थान के लोग गर्मी से निपटना जानते हैं, मौसम चुनाव टालने का कोई वैध आधार नहीं हो सकता।
*2.”संवैधानिक संकट पर चिंता* याचिकाकर्ताओं के वकीलों (पुनीत सिंघवी और प्रेमचंद देवंदा) ने कोर्ट को बताया कि सरकार बार-बार समय मांगकर चुनाव टाल रही है। इसके चलते ग्रामीण और शहरी निकायों में ‘अधिकारी राज’ चल रहा है, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
*अगली अहम तारीख*
चुनाव की तय समयसीमा (15 अप्रैल) का उल्लंघन करने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर अब अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
*सरकार ने चुनाव टालने के पीछे ये 3 मुख्य दलीलें दीं*
*ओबीसी आरक्षण* सरकार का कहना है कि ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की रिपोर्ट अभी पूरी तरह फाइनल नहीं हुई है, जिसके बिना चुनाव कराना सही नहीं होगा।
*एक साथ चुनाव की नीति* सरकार अक्टूबर से दिसंबर के बीच कार्यकाल पूरा करने वाली अन्य पंचायतों के साथ ही सभी चुनाव ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की तर्ज पर कराना चाहती है।
*संसाधनों की कमी*: इस अवधि में स्कूलों में एडमिशन और सरकारी कर्मचारियों की व्यस्तता का हवाला दिया गया।
*क्या रहा है अब तक का घटनाक्रम*
1. 14 नवंबर 2025: हाई कोर्ट ने सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने का डेडलाइन दिया था।
2. दिसंबर 2025: मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, जहां राज्य सरकार ने अप्रैल 2026 तक चुनाव संपन्न कराने का लिखित भरोसा दिया था।
3. 2 अप्रैल 2026: वादे के मुताबिक चुनाव न कराने और नया शेड्यूल जारी करने पर हाई कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग को अवमानना का नोटिस थमाया था।हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद अब यह साफ होगा कि राज्य में तुरंत चुनावी शंखनाद होगा या फिर सरकार को दिसंबर तक की मोहलत मिलेगी।
