अनिल कुमार
कठिन भूगोल और पथरीली जमीन भी नहीं रोक पाई ब्यावर की प्रगति की रफ्तार।
ब्यावर|स्मार्ट हलचल|राजस्थान का नवगठित जिला ब्यावर प्रधानमंत्री कुसुम सोलर पंप योजना के क्रियान्वयन में प्रदेश भर में मिसाल बनकर उभरा है। जिले की कठिन भौगोलिक बनावट और पथरीली भूमि जैसी तकनीकी बाधाओं के बावजूद, उद्यान विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए किसानों तक योजना का लाभ पहुँचाया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में ब्यावर ने प्रदेश स्तर पर 9वीं रैंक (कार्यक्षमता में 6ठा स्थान) हासिल कर अपनी प्रशासनिक मजबूती का लोहा मनवाया है।
लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
सरकार ने जिले के लिए 500 सोलर पंप सेट का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसके जवाब में उद्यान विभाग ने अब तक 315 किसानों को लाभान्वित कर दिया है। विभागीय जानकारी के अनुसार:
वर्ष 2025-26 में 262 नए किसानों को पंप आवंटित किए गए।
पूर्व वर्ष (2024-25) के 53 लंबित मामलों को भी इस वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया।
रात की सिंचाई के डर से मिली मुक्ति
जिले के जवाजा, रायपुर और मसूदा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए बिजली पर निर्भरता हमेशा से एक बड़ी समस्या रही है। सोलर पंप लगने से अब किसानों को दिन के समय ही पर्याप्त बिजली मिल जाती है। इससे न केवल उनकी खेती की लागत कम हुई है, बल्कि उन्हें कड़कड़ाती ठंड या रात के अंधेरे में सिंचाई करने की जोखिमभरी मजबूरी से भी राहत मिली है।
किसे और कितना मिल रहा लाभ?
उद्यान विभाग की उप निदेशक आरती यादव ने बताया कि योजना के तहत किसानों को भारी सब्सिडी दी जा रही है:
अनुदान: 3 HP से 10 HP तक के पंप सेट पर 60% तक की छूट।
विशेष सहायता: अनुसूचित जाति (SC) एवं जनजाति (ST) वर्ग के किसानों को 45 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता।
पात्रता: किसान के पास न्यूनतम 0.4 हेक्टेयर भूमि और जल भंडारण (फार्म पॉन्ड/हौज) होना अनिवार्य है। साथ ही, पूर्व में कोई कृषि बिजली कनेक्शन नहीं होना चाहिए।
सफलता के पीछे का संघर्ष
ब्यावर के कई क्षेत्रों में जमीन छोटी और पथरीली है। छोटे जोत वाले किसानों के लिए 0.4 हेक्टेयर की शर्त एक चुनौती थी, लेकिन विभाग ने सामूहिक आवेदन और तकनीकी मार्गदर्शन के जरिए इसे संभव बनाया। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शेष लक्ष्यों को भी जल्द से जल्द पूरा कर जिले को सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाया जाए।
