अजीम खान चिनायटा
स्मार्ट हलचल|इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना रमज़ान, दुनिया भर के मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है, जो गहन आध्यात्मिक चिंतन, आत्म-अनुशासन और भक्ति का प्रतीक है। 2026 में, यह पवित्र महीना लगभग 18 फरवरी को शुरू हुआ, जब दुनिया भर के मुसलमानों ने सुबह से शाम तक उपवास रखा।
1. आध्यात्मिक महत्व और उत्पत्ति
कुरान का अवतरण: मुसलमानों का मानना है कि पवित्र कुरान सर्वप्रथम पैगंबर मुहम्मद को इसी महीने में अवतरित हुई थी।
इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक: रमजान के दौरान उपवास रखना इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जो इसे एक आवश्यक इबादत बनाता है।
पापों का “जलना”: “रमजान” शब्द अरबी मूल शब्द रमद से लिया गया है ,जिसका अर्थ है “तीव्र गर्मी” या “धूप में पका हुआ”, जो उपवास और पश्चाताप के माध्यम से पापों के जलने का प्रतीक है।
लैलातुल क़द्र (शक्ति की रात): महीने की आखिरी दस रातों में आने वाली यह रात हज़ार महीनों से बेहतर मानी जाती है, जिसमें गहन प्रार्थनाओं का फल मिलता है।
2. मुख्य कार्यप्रणालियाँ और नियम
सौम (उपवास): सुबह (सुहूर) से लेकर सूर्यास्त (इफ्तार) तक, उपवास करने वाले लोग भोजन करने, तरल पदार्थ पीने, धूम्रपान करने और यौन गतिविधि में शामिल होने से परहेज करते हैं।
भोजन से परे संयम: उपवास केवल शारीरिक नहीं है; इसमें गपशप करना, बहस करना, झूठ बोलना, या अनुचित सामग्री में शामिल होना या उसे देखना जैसे नकारात्मक कार्यों से परहेज करना शामिल है।
दैनिक दिनचर्या: दिन की शुरुआत सुहूर (भोर से पहले का भोजन) से होती है और इफ्तार (रोजा खोलने) के साथ समाप्त होती है, जो अक्सर पैगंबर की परंपरा का पालन करते हुए खजूर और पानी के साथ किया जाता है।
तरावीह की नमाज़: मस्जिदों में विशेष रात्रि नमाज़ आयोजित की जाती हैं, जिसके दौरान अक्सर पूरे कुरान का पाठ किया जाता है जो पूरे महीने के दौरान पढ़ा जाता है।
दान (ज़कात और सदक़ा): उदारता पर ज़ोर दिया जाता है, विशेष रूप से महीने के अंत से पहले ज़कात अल-फ़ित्र (गरीबों के लिए दान) देने पर।
3. स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
शारीरिक विषहरण: उपवास विषहरण में सहायक होता है और रक्तचाप, रक्त शर्करा और बीएमआई को कम करने में कारगर सिद्ध हुआ है।
आंतों का स्वास्थ्य: शोध से पता चलता है कि उपवास का कार्यक्रम (सीमित भोजन अवधि) लाभकारी आंतों के बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है।
आध्यात्मिक और मानसिक परिवर्तन: यह धैर्य को बढ़ावा देने, कम भाग्यशाली लोगों के प्रति सहानुभूति रखने और अत्यधिक भोग-विलास की आदतों को तोड़ने का समय है।
4. सामुदायिक और सामाजिक बंधन
इफ्तार समारोह: एक साथ रोज़ा खोलना सामुदायिक संबंधों को मजबूत करता है, जिससे परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच एकता को बढ़ावा मिलता है।
सहानुभूति: दिन के दौरान अनुभव की जाने वाली भूख का उद्देश्य उन लोगों के प्रति करुणा उत्पन्न करना है जो परिस्थितियोंवश खाद्य असुरक्षा से पीड़ित हैं।
5. रमज़ान का समापन: ईद अल-फितर
महीने का समापन नए चांद दिखने के साथ होता है, जो ईद अल-फितर की शुरुआत का प्रतीक है , जो विशेष इबादतों, दान, परिवार के सदस्यों से मिलने और उपहारों के आदान-प्रदान से जुड़ा एक बड़ा उत्सव है।










