4 साल से बंद पड़ी बिजली लाइन पर लाखों खर्च, खेतों में बेकार खंभों से किसान परेशान
नियमों की अनदेखी कर विद्युत विभाग ने किया सरकारी धन का दुरुपयोग, जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
अलकेश पारीक
शक्करगढ़।स्मार्ट हलचल|क्षेत्र के बाकरा गांव में विद्युत विभाग की भारी लापरवाही और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कृषि विद्युत आपूर्ति के नाम पर करीब चार वर्ष पहले लाखों रुपये खर्च कर खेतों में बिजली की लाइन बिछाई गई थी, लेकिन आज तक यह लाइन चालू नहीं हो सकी। सरकारी धन की बर्बादी का प्रतीक बन चुकी यह अधूरी परियोजना अब किसानों के लिए सिरदर्द बन गई है, क्योंकि खेतों में गाड़े गए दर्जनों खंभों के कारण उनकी उपजाऊ भूमि बेवजह प्रभावित हो रही है।
योजना बनी, पर उपयोग नहीं
ग्रामीणों के अनुसार, यह विद्युत लाइन कृष्ण गोपाल सेन के खेत से बाघ की झोपड़ियों से होते हुए नारायण पुत्र उदा मीणा के खेत तक डाली गई थी। लेकिन बाद में विभाग ने नारायण मीणा को भीमपुरा फीडर से बिजली कनेक्शन दे दिया। इसके चलते लाखों रुपये की लागत से पहले तैयार की गई यह लाइन पूरी तरह से अनुपयोगी हो गई। विभाग की इस अदूरदर्शिता के कारण खेतों में तार और खंभे आज भी जस के तस खड़े हैं।
खेती के कामों में आ रही भारी बाधा
किसानों ने बताया कि खेतों के बीचों-बीच बेकार पड़े इन खंभों के कारण ट्रैक्टर संचालन, जुताई, बुवाई और सिंचाई जैसे कृषि कार्यों में लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर भूमि का उपयोग सीमित हो गया है, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ रहा है। बार-बार लिखित और मौखिक शिकायतों के बावजूद विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
सरकारी नियमों की उड़ रही धज्जियां
- राजस्थान वित्तीय नियम व GFR 2017: नियमों के अनुसार सरकारी धन का खर्च तभी उचित है जब उसकी वास्तविक आवश्यकता हो। इस प्रकरण में अर्थव्यवस्था, दक्षता और जवाबदेही (नियम 21 व 29) की स्पष्ट अनदेखी हुई है।
- विद्युत वितरण निगम के मानक: यदि कोई विद्युत संरचना अनुपयोगी है और किसानों को नुकसान पहुंचा रही है, तो विभाग उसे हटाने या वैकल्पिक उपयोग सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है।
- लोक सेवक आचरण नियम: लापरवाही या संसाधनों के दुरुपयोग के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
किसानों की चेतावनी: समाधान नहीं तो होगा आंदोलन
आक्रोशित किसानों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदारी तय कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। विभाग या तो इस लाइन को चालू कर लाभ दे या नियमों के तहत बेकार खंभों को हटाकर जमीन वापस उपलब्ध कराए।
