गिरफ्तारी का मामला
जानकारी के अनुसार पट्टी के तत्कालीन SDM नवराज सिंह बराड़ ने 5 सितंबर 2018 को तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर प्रदीप सभ्रवाल को इस मामले की शिकायत भेजी थी। शिकायत में कहा गया था कि 9 जनवरी 2018 से 11 फरवरी 2019 के बीच भूमि अधिग्रहण मुआवजे की राशि गलत तरीके से ट्रांसफर की गई। इसके बाद जांच शुरू हुई और 5 सितंबर 2019 को थाना सिटी पट्टी में IPC की धारा 419, 420, 409 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। मामले में जसबीर कौर, राजविंदर कौर, सरताज सिंह, बिक्रमजीत सिंह और गुरजीत कौर के खातों में रकम ट्रांसफर होने की बात सामने आई थी।
रिकॉर्ड में नहीं मिले लाभार्थियों के नाम
एफआईआर के अनुसार जांच में पाया गया कि जिन पांच लोगों को मुआवजा राशि दी गई, उनकी जमीन नेशनल हाईवे-54 के लिए अधिग्रहित ही नहीं की गई थी। माल विभाग के रिकॉर्ड में भी इन लोगों का कोई आधिकारिक विवरण नहीं मिला।
केंद्र सरकार ने 5 जुलाई 2013 को जारी गजट नोटिफिकेशन में पट्टी सब-डिवीजन के छह गांवों—ततला, हरिके, नत्थूपुर, बूह, मरहाना और जौनेके—की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में शामिल की थी। जांच एजेंसियों को इन पांच लोगों के नाम उस नोटिफिकेशन में नहीं मिले।
हस्ताक्षर के बाद जारी हुई थी राशि
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि तत्कालीन SDM अनुप्रीत कौर के हस्ताक्षर के बाद ही संबंधित भुगतान जारी किए गए थे। अधिकारियों ने इसे सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी बनाई गई थी। कमेटी की रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी गई, जिसके आधार पर तत्कालीन मुख्य सचिव करण अवतार सिंह ने अनुप्रीत कौर को सस्पेंड करने के आदेश जारी किए थे। लंबे समय तक उन्हें फील्ड पोस्टिंग से दूर रखा गया, लेकिन हाल ही में गुरदासपुर में SDM के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई थी।
