अनिल कुमार
जिला ब्यावर
स्मार्ट हलचल|ब्यावर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को आईटी, हेल्थ, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, ऑटोमोटिव और रिटेल जैसे व्यावसायिक विषयों के जरिए रोजगार के लिए तैयार करने वाले शिक्षक खुद आज गहरे आर्थिक और मानसिक संकट से जूझ रहे हैं। प्रदेश के करीब 4019 सरकारी विद्यालयों में समग्र शिक्षा अभियान (समसा) के तहत सेवाएं दे रहे 5 हजार से अधिक व्यावसायिक शिक्षकों (Vocational Trainers) को पिछले 13 महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने परिवार के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।
प्लेसमेंट एजेंसियों की लापरवाही और ठेका प्रथा का दंश
शिक्षकों का आरोप है कि विभिन्न प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत होने के कारण उनका भविष्य पूरी तरह असुरक्षित है। भीलवाड़ा और पाली सहित राज्यभर के जिलों में कार्यरत इन शिक्षकों का भुगतान इसलिए अटका हुआ है क्योंकि प्लेसमेंट एजेंसियां समय पर आवश्यक फाइलें शिक्षा विभाग को नहीं भेज रही हैं। एक तरफ विभाग लगातार नई गतिविधियों और काम के आदेश जारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षकों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। महंगाई के इस दौर में शिक्षक बच्चों की फीस, घर का किराया और रोजमर्रा के खर्चों के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं।
60 से अधिक जनप्रतिनिधियों का समर्थन, फिर भी सरकार मौन
व्यावसायिक शिक्षक संघ के पाली जिला अध्यक्ष चंद्रप्रकाश बागड़ी ने बताया कि इस जायज मांग को लेकर प्रदेश के 60 से अधिक विधायकों और सांसदों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर व ईमेल भेजकर समर्थन जताया है। इसके बावजूद सरकार इस गंभीर मुद्दे की लगातार अनदेखी कर रही है। यह न केवल शिक्षकों के साथ अन्याय है, बल्कि युवाओं के कौशल विकास के सपनों के साथ भी खिलवाड़ है।
“हमारी मांगें बेहद सरल और न्यायसंगत हैं। सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर अटके वेतन का भुगतान करे और ‘हरियाणा मॉडल’ को लागू करते हुए व्यावसायिक शिक्षकों को सरकारी सेवा में समायोजित करे। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पूरे राजस्थान के व्यावसायिक शिक्षक उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”
चंद्रप्रकाश बागड़ी, जिला अध्यक्ष, व्यावसायिक शिक्षक संघ (पाली)
