पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा ने ली पशु अधिकारियों की बैठक
शिवराज बारवाल मीना
टोंक/उनियारा।स्मार्ट हलचल|राजकीय पशु चिकित्सालय उनियारा में पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा की अध्यक्षता में विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय योजनाओं एवं कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों और कार्मिकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में संयुक्त निदेशक डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा ने सभी कार्मिकों को निर्धारित समय पर कार्यालय में उपस्थित होने तथा सुबह 8:10 बजे तक अपनी उपस्थिति की फोटो अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए।विभागीय लक्ष्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान कार्य की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। संयुक्त निदेशक ने पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वर्षा रानी सहित सभी कार्मिकों को प्रत्येक माह लक्ष्य के अनुरूप कृत्रिम गर्भाधान कार्य करने एवं उसकी ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जिन संस्थाओं की प्रगति 15 प्रतिशत से कम है, उन्हें तत्काल नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए।
*शत-प्रतिशत ऑनलाइन प्रविष्टि और शिविरों के आयोजन पर जोर*
बैठक में एफएमडी (FMD) टीकाकरण अभियान की समीक्षा करते हुए सभी संस्था प्रभारियों को निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा कर शत-प्रतिशत ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वर्षा रानी ने बताया कि बैठक में प्रशासनिक एवं पशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।संयुक्त निदेशक ने उपनिदेशक एवं बीवीएचओ को निर्देशित किया कि अवकाश पर रहने वाले संस्था प्रभारियों की सूचना के लिए अलग रजिस्टर संधारित किया जाए। साथ ही क्षेत्र में पशुओं में बढ़ रही बांझपन की समस्या को देखते हुए प्रत्येक संस्था स्तर पर हर माह दो बांझपन निवारण शिविर आयोजित करना अनिवार्य किया गया।
*भीषण गर्मी में पशुओं की सुरक्षा के निर्देश*
वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी को देखते हुए गौशालाओं के संचालकों को पशुओं के लिए उचित छाया, पानी एवं अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि पशुओं को गर्मी से राहत मिल सके।इसके अलावा संस्थाओं को आवंटित लक्ष्यों के अनुसार नियमित रूप से बंध्याकरण कार्य पूर्ण करने तथा पशुपालकों को सेक्स सॉर्टेड सीमन के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए गए, जिससे क्षेत्र में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़े और पशुपालकों को आर्थिक लाभ मिल सके।
