शाश्वत तिवारी
न्यूयॉर्क। स्मार्ट हलचल।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ पर आयोजित वार्षिक खुली बहस में भारत ने नागरिकों की मौतों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) की नीति अपनाने का आह्वान किया है। भारत ने कहा कि आतंकवाद को शरण देने और प्रायोजित करने वाले देशों (पाकिस्तान की तरफ इशारा) की वैश्विक जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसके साथ ही भारत ने पाकिस्तान के इतिहास को कलंकित बताते हुए याद दिलाया कि 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान उसकी अपनी सेना ने लाखों नागरिकों पर सुनियोजित अत्याचार और नरसंहार किया था।
इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने भारत का पक्ष रखते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है और आतंकवाद को शरण देने एवं प्रायोजित करने वाले देशों की वैश्विक जवाबदेही तय होनी चाहिए।
न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन के एक बयान के अनुसार भारत ने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए सीमा पार हमलों की भी निंदा की, जिसमें 269 अफगान नागरिक मारे गए थे और 94,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए थे।
मिशन ने हरीश के हवाले से अपने बयान में कहा पाकिस्तान के ऐसे घिनौने हमले उस देश के लिए हैरानी की बात नहीं होनी चाहिए, जो अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और सिस्टमैटिक नरसंहार करता है। 1971 में ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान, पाकिस्तान ने अपनी ही सेना द्वारा 400,000 महिला नागरिकों के नरसंहार वाले सामूहिक बलात्कार के सिस्टमैटिक अभियान को मंज़ूरी दी थी। ऐसा अमानवीय व्यवहार दशकों से पाकिस्तान की अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा के बढ़ते हताश करने वाले कामों के ज़रिए अंदरूनी नाकामियों को बाहर दिखाने की बार-बार की कोशिशों को दिखाता है।
भारतीय राजनयिक ने अपने संबोधन के अंत में कहा निष्कर्ष के तौर पर, भारत इस बात को दोहराता है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सुरक्षा परिषद के प्रयासों के केंद्र में नागरिकों की सुरक्षा ही होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रति सम्मान को बहाल और सुनिश्चित किया जा सके तथा जवाबदेही को मजबूत किया जा सके।
