शाहपुरा-मूलचन्द पेसवानी
शाहपुरा की वीरभूमि शनिवार को एक बार फिर राष्ट्रभक्ति, शौर्य और सनातन संस्कृति के रंग में रंग उठी। भारत माता के जयघोष, “वन्दे मातरम” के सामूहिक गान और देशभक्ति से ओतप्रोत नारों के बीच शहीद प्रताप सिंह बारहठ की 133वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले “शहीद वंदना समारोह” में भाग लेने के लिए शाहपुरा से सोमनाथ गुजरात तक निकलने वाली “वन्दे मातरम् यात्रा 2026” को विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने भगवा झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस मौके पर विधायक डॉ. लालाराम बैरवा ने कहा कि “देशभक्ति और गौरव के अनूठे संगम के साथ आज वन्दे मातरम् यात्रा 2026 का शुभारंभ हुआ है। यह यात्रा केवल शाहपुरा से सोमनाथ तक का सफर नहीं, बल्कि भारत माता के अमर सपूतों के बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान है।” उन्होंने कहा कि ठाकुर केसरी सिंह बारहठ, कुंवर प्रताप सिंह बारहठ और जोरावर सिंह बारहठ की त्रिमूर्ति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की अमिट पहचान है। उनके त्याग, तप और राष्ट्रप्रेम की गाथाएं सदैव युवाओं को प्रेरित करती रहेंगी।
कार्यक्रम में भाजपा जिला मंत्री राजेंद्र बोहरा, नगर भाजपा अध्यक्ष पंकज सुगंधी और रमेश मारू सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
क्रांति तीर्थ शाहपुरा से प्रारंभ हुई यह यात्रा केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद, बलिदान और भारतीय संस्कृति के गौरव का जीवंत संदेश बनकर निकली। बस में सवार युवाओं, महिलाओं और समाजजनों के हाथों में तिरंगा लहरा रहा था, जबकि वातावरण “भारत माता की जय”, “वन्दे मातरम” और “अमर शहीद प्रताप सिंह बारहठ अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। हर चेहरे पर देशभक्ति का उत्साह और शहीदों के प्रति श्रद्धा साफ झलक रही थी।
इस समारोह में देशभर से हजारों राष्ट्रभक्तों और समाजजनों के शामिल होने की संभावना है। शाहपुरा से रवाना हुई यह यात्रा भीलवाड़ा, मेघटिया, ककरोली, नाथद्वारा, एकलिंगजी, उदयपुर और हिम्मतनगर होते हुए गुजरात पहुंचेगी। सात दिवसीय इस यात्रा के दौरान प्रतिदिन कार्यक्रम का शुभारंभ और समापन “वन्दे मातरम्” गान और शहीद वंदना के साथ किया जाएगा। यात्रा के दौरान शहीद स्मारकों और तीर्थ स्थलों पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
प्रताप सेवा संसथान के सचिव कैलाश सिंह जाड़ावत ने बताया कि वन्दे मातरम् यात्रा बारहठ परिवार के सात सौ वर्षों पुराने गौरवशाली इतिहास, धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा और स्वाभिमान की स्मृतियों को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि बारहठ परिवार की त्याग और बलिदान की गाथाएं नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि युवाओं में राष्ट्र के प्रति समर्पण, संस्कृति के प्रति गौरव और शहीदों के प्रति सम्मान की भावना जागृत हो सके।
उन्होंने बताया कि महान क्रांतिकारी ठाकुर केसरी सिंह बारहठ परिवार की राष्ट्रसेवा और बलिदान की परंपरा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रताप सिंह बारहठ सेवा संस्थान द्वारा पूर्व में राष्ट्र गौरव क्रांति रथ यात्रा 2012, मेवाड़ गौरव यात्रा 2018 और अमृत कलश यात्रा 2022 का आयोजन किया जा चुका है। इसी कड़ी में वर्ष 2026 में “वन्दे मातरम् यात्रा” आयोजित की जा रही है।
इतिहास के पन्नों को याद करते हुए जाड़ावत ने बताया कि लगभग 700 वर्ष पूर्व गुजरात की बरवड़ी माता ने महाराणा हम्मीर सिंह सिसोदिया को चित्तौड़ विजय का आशीर्वाद दिया था। साथ ही अपने पुत्र बारू चारण को 500 घुड़सवारों के साथ भेजकर चित्तौड़ पर महाराणा का अधिकार स्थापित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज भी चित्तौड़गढ़ में बरवड़ी माता का मंदिर अन्नपूर्णा माता के नाम से श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इसी गौरवशाली वंश परंपरा में केसरी सिंह बारहठ का परिवार आता है।
उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात के महान संत स्वामी दयानंद सरस्वती के शिष्य ठाकुर कृष्ण सिंह बारहठ रहे थे। वहीं महान क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा को भी मेवाड़ में आमंत्रित करने का श्रेय बारहठ परिवार को जाता है। सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा रियासतों के एकीकरण के समय शाहपुरा पहली रियासत थी जिसने स्वेच्छा से भारत संघ में विलय किया था।
24 मई को गुजरात के खंभालिया में शहीद प्रताप सिंह बारहठ की जयंती पर भव्य शहीद वंदना समारोह आयोजित होगा। इस दौरान “केसरी सिंह बारहठ पुरस्कार” वीरांजलि आयोजन समिति गुजरात को 51 हजार रुपये नकद और स्मृति चिह्न के साथ प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा “जोरावर सिंह बारहठ पराक्रम सम्मान” राजऋषि उमेद सिंह धोली ठाकुर को मरणोपरांत दिया जाएगा।
“वीरमाता माणिक कंवर नारीशक्ति वंदन सम्मान” विकल्प संस्था की ऊषा चैधरी को प्रदान किया जाएगा, जबकि “शहीद प्रताप सिंह बारहठ प्रताप गौरव युवा सम्मान” गुजरात के जिग्नेश गढ़वी की शहादत की स्मृति में स्वतंत्रता सेनानी फतह करण सिंह चारण झीबा स्मृति कोष अडूसियां के सहयोग से दिया जाएगा। प्रत्येक सम्मान के तहत 11-11 हजार रुपये की राशि, स्मृति चिन्ह, मानपत्र, शॉल और माला भेंट कर अभिनंदन किया जाएगा।
समारोह में राजस्थान से मेघराज सिंह रॉयल, पूर्व आईएएस राजेंद्र सिंह शेखावत, क्रांतिकारी बारहठ परिवार के सदस्य, मुख्य वक्ता डॉ. गजादान चारण और राजवीर सिंह चालकोई को आमंत्रित किया गया है।
शाहपुरा से निकली यह वन्दे मातरम् यात्रा अब राष्ट्रभक्ति की ज्योति लेकर गुजरात की ओर अग्रसर हो चुकी है। तिरंगे की छांव, शहीदों की स्मृतियां और “वन्दे मातरम” के स्वर इस यात्रा को केवल आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का महापर्व बना रहे हैं।