शिव जांगिड़
लाडपुरा|स्मार्ट हलचल।कस्बे के सामुदायिक भवन प्रांगण परिसर में ग्रामवासी द्वारा रविवार को कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक आयोजन के तृतीय दिवस श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान को केवल भाव और भक्ति से ही प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रसंग में महाराज श्री ने विदुर चरित्र का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि प्रभु बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल भाव को स्वीकार करते हैं।
महाराज श्री ने कहा कि बालकों में संस्कारों का होना अत्यंत आवश्यक है तथा संस्कारों के साथ सत्संग भी जीवन की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस स्थान पर वर्षा अत्यधिक हो जाए अथवा बिल्कुल कम हो, वहां की फसलें खराब हो जाती हैं। ठीक उसी प्रकार जिस समाज और परिवार में कथा एवं सत्संग का अभाव होता है, वहां आने वाली पीढ़ियां संस्कारहीन हो जाती हैं।
उन्होंने सभी माताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चों में अच्छे संस्कार डालने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी माता की होती है। माता यदि धर्म, भक्ति और सदाचार के संस्कार देती है तो वही बालक आगे चलकर समाज और राष्ट्र का गौरव बनता है।
कथा के दौरान भगवान के नाम महात्म्य का वर्णन करते हुए महाराज श्री ने कहा कि संसार का व्यवहार दाम से चलता है, लेकिन प्रभु का व्यवहार भगवान के नाम से चलता है। जिसने सच्चे हृदय से भगवान का नाम स्मरण किया, उस पर प्रभु की कृपा अवश्य होती है।
तत्पश्चात महाराज श्री ने भक्त प्रह्लाद एवं नरसिंह भगवान के अवतार की पावन एवं रोमांचकारी कथा का श्रवण कराकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
इस भागवत कथा के दौरान शंभू धाकड़, राधकिशन सुथार, भगवान सुथार, शांति सोमानी, नारायण सनाढ्य, गोविंद सनाढ्य, सहित ग्रामवासी एवं महिलाएं बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
आयोजकों ने बताया कि यह सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा प्रतिदिन सामुदायिक भवन परिसर में प्रातः 10:15 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक आयोजित की जा रही है। कथा का समापन 30 मई को प्रसादी के साथ होगा।
