आसाराम को राजस्थान हाई कोर्ट ने गैंगरेप और बच्चे के यौन उत्पीड़न के मामले में किया बरी

स्मार्ट हलचल।राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को गैंगरेप और आपराधिक साजिश के आरोपों से बरी कर दिया है, लेकिन नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में उसकी उम्रकैद की सज़ा बरकरार रखी है। अदालत ने उसे तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

फैसले की मुख्य बातें

  • गैंगरेप और POCSO की गंभीर धाराओं से बरी
    • IPC धारा 376(D) (गैंगरेप) और POCSO की धारा 5(G)/6 से राहत मिली।
    • आपराधिक साजिश (IPC 120(B)) से भी बरी।
  • नाबालिग से बलात्कार की सज़ा बरकरार
    • IPC धारा 376(2)(F) के तहत दोषसिद्धि कायम।
    • उम्रकैद की सज़ा जारी रहेगी।
  • अन्य धाराओं में दोषसिद्धि कायम
    • IPC की धाराएँ: 342 (गलत तरीके से कैद), 370(4) (मानव तस्करी), 506 (धमकी), 509 (महिला की मर्यादा का अपमान), 354(A) (यौन उत्पीड़न)।
    • POCSO की धाराएँ 7/8 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 भी बरकरार।
  • सह-आरोपियों को राहत
    • शिल्पी (संचिता गुप्ता) और शरत चंद्र को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया गया।

पृष्ठभूमि

  • 2013 मामला: आसाराम पर आरोप था कि उसने जोधपुर आश्रम में एक नाबालिग छात्रा का यौन शोषण किया।
  • 2018 में ट्रायल कोर्ट का फैसला: उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई थी।
  • 2026 हाई कोर्ट का फैसला: आंशिक राहत, लेकिन उम्रकैद बरकरार।

कानूनी और सामाजिक असर

  • कानूनी दृष्टि से: यह फैसला दिखाता है कि अदालत ने सबूतों का गहन मूल्यांकन किया और केवल उन्हीं आरोपों को बरकरार रखा जिनमें पर्याप्त प्रमाण मिले।
  • सामाजिक दृष्टि से: आसाराम जैसे स्वयंभू “गॉडमैन” के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई समाज में धार्मिक संस्थाओं की जवाबदेही पर बहस को और गहरा करती है।

आगे क्या होगा?

  • आसाराम को तुरंत सरेंडर करना होगा क्योंकि उसकी उम्रकैद की सज़ा बरकरार है।
  • बचाव पक्ष सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकता है, लेकिन फिलहाल वह दोषी ही माना जाएगा।

    कौन हैं आसाराम?

    अप्रैल 1941 में मौजूदा पाकिस्तान के सिंध इलाके के बेरानी गांव में पैदा हुए आसाराम का असली नाम असुमल हरपलानी है.

    सिंधी व्यापारी समुदाय से संबंध रखने वाले आसाराम का परिवार 1947 में विभाजन के बाद भारत के अहमदाबाद शहर में आ बसा.

    साठ के दशक में उन्होंने लीलाशाह को अपना आध्यात्मिक गुरु बनाया. बाद में लीलाशाह ने ही असुमल का नाम आसाराम रखा.

    1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे में साबरमती नदी के किनारे अपनी पहली कुटिया बनाई.

    यहाँ से शुरू हुआ आसाराम का आध्यात्मिक प्रोजेक्ट धीरे-धीरे गुजरात के अन्य शहरों से होता हुआ देश के अलग-अलग राज्यों में फैल गया.