पत्रकारों ने जाना राजियावास तालाब का इतिहास, ब्यावर क्षेत्र की जल संचय व्यवस्थाओं को सराहा

अनिल कुमार

ब्यावर।स्मार्ट हलचल।राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के तहत क्षेत्र के पत्रकारों ने राजियावास तालाब का विशेष भ्रमण किया। इस दौरान मीडियाकर्मियों ने क्षेत्र में संचालित जल संरक्षण, जल संचय की गतिविधियों और उनकी कार्यप्रणाली को करीब से देखा और समझा।

वर्षा जल संचयन और तकनीक पर चर्चा
भ्रमण के दौरान जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियंता (JEN) पृथ्वीराज ने उपस्थित पत्रकारों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने तकनीकी पहलुओं को साझा करते हुए जानकारी दी कि किस तरह वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) और स्थानीय जल संरचनाएं क्षेत्र के जल स्तर को सुधारने में अपनी भूमिका निभा रही हैं।

ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी है राजियावास तालाब
ग्राम पंचायत राजियावास के सरपंच श्री बृजपाल सिंह रावत ने तालाब की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके स्थानीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “यह तालाब वर्षों से ग्रामीणों के लिए पानी का मुख्य स्रोत रहा है। वर्तमान में जनसहभागिता के माध्यम से गांव में जल संरक्षण के कई सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं।”

क्षेत्र की प्रमुख जल संरचनाओं का ब्योरा
कनिष्ठ अभियंता पृथ्वीराज ने बताया कि विभाग की मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के तहत फूलसागर जालिया बांध, नारायण सागर बांध और रायपुर लूणी बांध प्रमुख संरचनाएं हैं, जिनसे सिंचाई और जल संरक्षण का काम हो रहा है। इसके अलावा क्षेत्रवार जल स्रोतों का विवरण इस प्रकार है:

ब्यावर क्षेत्र: राजियावास तालाब, जवाजा, देलवाड़ा, मकरेड़ा, बलाड़, काबरा, कालीकांकर तालाब और फूलसागर जालिया बांध।
मसूदा क्षेत्र: नारायण सागर एवं लौहड़ी बांध।
बदनौर क्षेत्र: देव सागर
जैतारण क्षेत्र: रायपुर लूणी बांध, गिरीनन्दा और बाबरा।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि पंचायत समिति विभाग से हस्तांतरित 96 अन्य तालाब भी क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो भूजल स्तर को बढ़ाने (ग्राउंडवॉटर रिचार्ज) में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी (PRO) सतीश सोनी ने बताया कि इस भ्रमण के दौरान पत्रकारों ने जल स्रोतों के रखरखाव और सरकार व प्रशासन द्वारा जल संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को देखा और उनकी सराहना की।