लाखों की लागत,13 साल की उपेक्षा:महिलाओं का स्नानघर आज तक नहीं हुआ शुरू,पंचायत पर लापरवाही के आरोप

मुकेश खटीक
मंगरोप।कस्बे के झोपड़िया मार्ग पर करीब 13 वर्ष पूर्व पंचायत प्रशासन द्वारा महिलाओं की सुविधा के लिए लाखों रुपये की लागत से स्नानघर का निर्माण करवाया गया था।दाहसंस्कार के बाद महिलाओं के स्नान की समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए गए इस स्नानघर में पाइपलाइन से जोड़कर कुल 24 टोंटियां भी लगाई गई थीं,लेकिन आज हालात यह हैं कि नल-टोंटियां समूल नदारद हो चुकी हैं।विडंबना यह है कि इतने वर्षों बाद भी इस स्नानघर का न तो आज तक लोकार्पण हो पाया और न ही इसे महिलाओं के उपयोग के लिए सुचारू किया जा सका।ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालीन पंचायत प्रशासन ने सामाजिक जरूरतों और महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्माण कार्य कराया था,लेकिन वर्षों तक रखरखाव के अभाव और उपेक्षा के चलते बिना लोकार्पण के ही यह स्नानघर अब पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है।स्थानीय लोगों के अनुसार स्नानघर का ढांचा जगह-जगह से कमजोर हो गया है,दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और लगाए गए नल-टोंटियां भी टूट-फूट कर बेकार हो गई हैं।इससे लाखों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद यह सार्वजनिक सुविधा आज तक जनता के काम नहीं आ सकी।ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है।उनका आरोप है कि पंचायत प्रशासन की लापरवाही और उदासीन रवैये के कारण यह उपयोगी योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई।यही नहीं,सांवरिया जी मंदिर के पास भी करीब 27 वर्ष पूर्व महिलाओं के लिए एक स्नानघर का निर्माण करवाया गया था,लेकिन वह भी आज तक उपयोगी साबित नहीं हो सका।ग्रामीणों का कहना है कि दोनों ही स्नानघरों का निर्माण उपयुक्त स्थानों पर नहीं किए जाने के कारण भी इनका लाभ महिलाओं को नहीं मिल पाया।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि या तो इन स्नानघरों का शीघ्र लोकार्पण कर आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य करवाकर महिलाओं के लिए शुरू किया जाए।