Fast Track Special Courts (FTSCs) की भूमिका
- स्थापना: 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और Criminal Law (Amendment) Act, 2018 के बाद शुरू।
- संख्या: वर्तमान में 745 FTSCs, जिनमें 404 विशेष POCSO कोर्ट्स शामिल हैं।
- प्रभाव: 2024 में 88,902 नए मामले दर्ज हुए और 85,595 मामले निपटाए गए।
- कुल निपटान: अब तक 3,06,604 मामले निपटाए गए।
- वित्तीय सहायता: योजना को 2026 तक बढ़ाया गया है, ₹1952.23 करोड़ का बजट Nirbhaya Fund से।
चुनौतियाँ
- बैकलॉग: लाखों मामले अभी भी लंबित हैं।
- सीमित संसाधन: जजों और कोर्ट स्टाफ की कमी।
- प्रक्रियात्मक देरी: जांच और गवाही में समय लगता है।
Fast Track Special Courts (FTSCs) महिला सुरक्षा मामलों में न्यायिक देरी को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
FTSCs की स्थापना और उद्देश्य
स्थापना: 2019 में सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद शुरू किए गए।
उद्देश्य: रेप और POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) मामलों का त्वरित निपटारा करना।
वित्तीय सहायता: Nirbhaya Fund से ₹1952.23 करोड़ का बजट आवंटित।
वर्तमान स्थिति
745 FTSCs देशभर में कार्यरत हैं।
इनमें से 404 विशेष POCSO कोर्ट्स हैं।
2024 में 88,902 नए मामले दर्ज हुए और 85,595 मामले निपटाए गए।
अब तक कुल 3,06,604 मामले निपटाए गए।
भूमिका और प्रभाव
तेज़ सुनवाई: रेप और यौन अपराध मामलों में समयबद्ध सुनवाई।
बैकलॉग कम करना: लंबित मामलों की संख्या घटाने में मदद।
विशेषीकृत जज: संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित जज और स्टाफ।
पीड़ित सहायता: survivors को काउंसलिंग और कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
चुनौतियाँ
जजों की कमी: कई FTSCs में पर्याप्त जज नहीं हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर: कोर्ट भवन और तकनीकी सुविधाओं की कमी।
प्रक्रियात्मक देरी: पुलिस जांच और गवाहों की उपलब्धता में समय लगता है।
निष्कर्ष
FTSCs ने महिला सुरक्षा मामलों में न्यायिक देरी को कम करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी संसाधनों और जजों की कमी जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। यदि इन्हें दूर किया जाए तो महिला सुरक्षा मामलों में न्याय की गति और भरोसा दोनों बढ़ सकते हैं।
आगे का रास्ता
- समयबद्ध सुनवाई: CrPC और POCSO Act में तय समयसीमा का सख्ती से पालन।
- जजों की संख्या बढ़ाना: FTSCs को और मज़बूत करना।
- तकनीक का उपयोग: वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और ई-कोर्ट्स से सुनवाई तेज़ करना।
- पीड़ित सहायता: survivors के लिए काउंसलिंग और कानूनी सहायता को मज़बूत करना।
