मंगरोप@मुकेश खटीक।कस्बे में गुरुवार को आयोजित होने वाले जनसुनवाई कार्यक्रम से पहले पंचायत प्रशासन की कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।आज जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू मंगरोप में आमजन की समस्याएं सुनेंगे,लेकिन उनके आगमन से ठीक पहले कस्बे में वर्षों से उपेक्षित पड़े मार्गों और सार्वजनिक स्थानों पर अचानक सफाई अभियान शुरू होने से ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दे रही है।ग्रामीणों का आरोप है कि जिन रास्तों और गलियों में लंबे समय से कचरे के ढेर लगे हुए थे,जहां नियमित सफाई व्यवस्था लगभग ठप पड़ी थी,वहां अब जनसुनवाई कार्यक्रम के एक दिन पहले युद्धस्तर पर सफाई करवाई जा रही है।लोगों का कहना है कि यदि पंचायत प्रशासन नियमित रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन करता तो कस्बे को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।स्थानीय नागरिकों के अनुसार कस्बे के कई मार्ग लंबे समय से गंदगी,कचरे और अव्यवस्थित सफाई व्यवस्था के कारण परेशानी का कारण बने हुए थे। कई बार शिकायतें करने के बावजूद स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ,लेकिन जैसे ही जिला कलेक्टर के आगमन का कार्यक्रम तय हुआ,सफाई कर्मियों और संसाधनों को सक्रिय कर दिया गया।ग्रामीणों का कहना है कि यह सफाई अभियान आमजन की सुविधा के लिए नहीं बल्कि जिला कलेक्टर के सामने कस्बे की वास्तविक स्थिति छिपाने और प्रशासनिक छवि चमकाने का प्रयास प्रतीत होता है।उनका आरोप है कि पंचायत प्रशासन केवल वीआईपी दौरों और अधिकारियों के निरीक्षण के समय ही सक्रिय नजर आता है,जबकि सामान्य दिनों में समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दिया जाता।कई ग्रामीणों ने मांग की है कि जनसुनवाई के दौरान जिला कलेक्टर को कस्बे की वास्तविक समस्याओं से अवगत कराया जाएगा ताकि सफाई व्यवस्था,कचरा निस्तारण और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान हो सके। उनका कहना है कि केवल अधिकारियों के दौरे से पहले दिखावटी सफाई करने के बजाय पूरे वर्ष नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आज होने वाली जनसुनवाई में क्षेत्र के लोग सफाई व्यवस्था, पेयजल, सड़क, नालियों और अन्य जनसमस्याओं को लेकर भी अपनी बात जिला प्रशासन के समक्ष रखेंगे। वहीं कस्बे में अचानक शुरू हुई सफाई व्यवस्था चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल मान रहे हैं।
