विधायक गोपाल खंडेलवाल के भतीजे की लीज पर खनिज विभाग का ‘हंटर’, सत्ता की धौंस में निगल गए सवा करोड़ की सरकारी जमीन

🔴 महाखुलासा: सत्ता के नशे में चूर माइनिंग सिंडिकेट पर बड़ा प्रहार

विधायक गोपाल खंडेलवाल के भतीजे की लीज पर खनिज विभाग का ‘हंटर’, सत्ता की धौंस में निगल गए सवा करोड़ की सरकारी जमीन!

[विशेष ब्यूरो रिपोर्ट]
भीलवाड़ा/बिजोलिया, स्मार्ट हलचल।

सूबे की भजनलाल सरकार जहाँ एक तरफ भ्रष्टाचार और अवैध माइनिंग पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का डंका पीट रही है, वहीं भीलवाड़ा के बिजोलिया (ऊपरमाल) क्षेत्र से सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा करने वाली बेहद सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहाँ मांडलगढ़ से भाजपा विधायक गोपाल खंडेलवाल के सगे भतीजे की माइनिंग लीज पर खनिज एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने तगड़ा शिकंजा कसा है। विभागीय टीम ने रसूखदारों द्वारा सरकारी भूमि पर किए जा रहे अवैध खनन का भंडाफोड़ करते हुए मौके पर ही 1 करोड़ 25 lakh रुपए का भारी-भरकम पंचनामा ठोका है। इस कार्रवाई के बाद से ही क्षेत्र के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और विधायक की छवि पर गहरा दाग लगा है।

सत्ता के रसूख तले सवा करोड़ का ‘महा-खेला’: स्वीकृत सीमा लांघ सरकारी भूमि पर डाका!

विश्वस्त विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह विवादित और अवैध खनन का पूरा खेल आरोली-रसदपुरा क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहा था। यह माइनिंग लीज मांडलगढ़ विधायक गोपाल खंडेलवाल के भतीजे जगदीश चंद्र खंडेलवाल के नाम पर आवंटित है। संयुक्त टीम की बारीकी से की गई पैमाइश और जांच में चौंकाने वाला सच सामने आया है। विधायक के भतीजे ने अपने राजनीतिक रसूख की आड़ में स्वीकृत लीज सीमा को ताक पर रख दिया और आसपास की बेशकीमती सरकारी (बिलानाम) भूमि पर अवैध कब्जा जमाकर धुआंधार माइनिंग शुरू कर दी। विभाग की इस औचक कार्रवाई से विधायक खेमे में खलबली मच गई है और बचाव का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।

विपक्ष और जनता का सीधा हमला: “जब सत्ताधारी विधायक के सगे भतीजे की लीज से सवा करोड़ रुपए की खनिज चोरी पकड़ी जा सकती है, तो अंदाजा लगाइए कि पूरे बिजोलिया क्षेत्र में कितने गहरे तक अवैध खनन के मगरमच्छ जड़े जमाए बैठे हैं? प्रशासन केवल एक जगह दिखावे की कार्रवाई कर बाकी रसूखदारों को अभयदान क्यों दे रहा है? विधायक को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।”

बिजोलिया के एक दर्जन से अधिक गांवों में खनन माफिया का नंगा नाच

स्थानीय ग्रामीणों का खुला आरोप है कि बिजोलिया खनन क्षेत्र में सरकारी, बिलानाम और गरीब पशुओं की चारागाह (गौचर) भूमि को खनन माफिया पूरी तरह निगलने पर आमादा है। लंबे समय से प्रशासन को शिकायतें भेजी जा रही थीं, लेकिन विधायक के कथित राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक सुस्ती के कारण आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। क्षेत्र के ये गांव इस समय अवैध खनन के सबसे बड़े गढ़ बने हुए हैं:

  • नयानगर, सुखपुरा, खडीपुर, मोतीपुरा और आँट
  • चंपापुर, भाट खरला, सतकुड़िया और बहादुरजी का खेड़ा
  • राणाजी का गुढ़ा, नीमड़ी गुआ, काली घाटी, उदपुरिया और गोविंदपुरा

मई-जून में 20 पंचनामे, फिर भी हौसले बुलंद; आखिर किसका है वरदहस्त?

अंदरखाने से छनकर आ रही रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले मई और जून के इस चालू सीजन में ही राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीमों ने करीब 20 अलग-अलग जगहों पर अवैध खनन के बड़े पंचनामे बनाए हैं। लेकिन सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह है कि इन कागजी कार्रवाइयों के बाद भी धरातल पर माइनिंग माफिया का नेटवर्क थमता क्यों नहीं? आखिर इन गुनहगारों को किसका मजबूत राजनीतिक संरक्षण और अभयदान प्राप्त है?

जनता की हुंकार: तत्काल हो ‘ड्रोन सर्वे’, दर्ज हो क्रिमिनल FIR

विधायक के भतीजे पर हुई इस बड़ी कार्रवाई ने स्थानीय जनता के सब्र का बांध तोड़ दिया है। क्षेत्रवासियों और पर्यावरणविदों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दो टूक मांग की है कि पूरे बिजोलिया खनन क्षेत्र की हकीकत सामने लाने के लिए तत्काल ‘ड्रोन सर्वे’ कराया जाए। साथ ही, केवल जुर्माना वसूलने के बजाय सत्ताधारी रसूखदारों सहित सभी दोषियों के खिलाफ नामजद क्रिमिनल केस (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए ताकि ‘जीरो टॉलरेंस’ का नाटक बंद हो सके।

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