77 लाख के गबन के आरोपी लिपिक को हाईकोर्ट से झटका, बर्खास्तगी फिर हुई बहाल

(महेन्द्र नागौरी)

फर्जी बिलों से न्यायालय को लगाया था 77 लाख का चूना, डबल बेंच ने रोक हटाई; जिला न्यायाधीश ने तत्काल किया पदमुक्त

भीलवाड़ा|स्मार्ट हलचल।जिला न्यायालय में फर्जी बिलों के जरिए करीब 77 लाख रुपये के गबन के बहुचर्चित मामले में आरोपी लिपिक देवेन्द्र कुमार जोशी को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने उसकी बर्खास्तगी पर लगी रोक को स्थगित कर दिया है, जिसके बाद जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अभय जैन ने पूर्व में जारी बर्खास्तगी आदेश को पुनः प्रभावी करते हुए जोशी को सेवा से बर्खास्त रखने तथा तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार जिला न्यायालय में कार्यरत लिपिक देवेन्द्र कुमार जोशी के खिलाफ फर्जी बिलों के माध्यम से लगभग 77 लाख रुपये के गबन का गंभीर मामला सामने आया था। मामले की जांच के लिए गठित हाईपावर कमेटी ने जांच के बाद जोशी को दोषी पाया था। इसके आधार पर जिला न्यायाधीश अभय जैन ने 28 अगस्त 2025 को उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
सिंगल बेंच से मिली थी राहत, रायपुर न्यायालय में हुआ था पदस्थापन
बर्खास्तगी के आदेश को चुनौती देते हुए देवेन्द्र कुमार जोशी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस पर 19 मई 2026 को उसे अंतरिम राहत मिल गई थी और बर्खास्तगी आदेश पर स्थगन लगा दिया गया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जोशी को पुनः सेवा में बहाल कर उसका पदस्थापन रायपुर न्यायालय में किया गया था।
डबल बेंच ने पलटा फैसला, फिर प्रभावी हुई बर्खास्तगी
मामले में नया मोड़ तब आया जब राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की डबल बेंच ने डी.बी. स्पेशल अपील रिट संख्या 699/2026 में 5 जून 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए पूर्व में दिए गए स्थगन आदेश की क्रियान्विति पर ही रोक लगा दी। डबल बेंच के इस आदेश के बाद देवेन्द्र कुमार जोशी को मिली राहत समाप्त हो गई।
उच्च न्यायालय के आदेश की पालना में जिला न्यायाधीश अभय जैन ने बर्खास्तगी संबंधी 28 अगस्त 2025 के आदेश को पुनः प्रभावी कर दिया तथा जोशी की सेवा से बर्खास्तगी यथावत रखने के साथ उसे तत्काल प्रभाव से पदमुक्त करने के आदेश जारी कर दिए।
न्यायिक महकमे में चर्चाओं का विषय बना मामला
न्यायालय में करोड़ों रुपये के सरकारी भुगतान से जुड़े फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपये के कथित गबन का यह मामला लंबे समय से न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। डबल बेंच के ताजा आदेश के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।