सड़क सुरक्षा सर्वोपरि, फिर 10 साल से मिट्टी का राजमार्ग क्यों? NH-758 पर टोल वसूली फुल, व्यवस्थाएं गुल

बिगोद कस्बे में एक दशक से राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण अधूरा, विद्युत लाइनों के बीच से गुजर रहे वाहन; बिना भू-अधिग्रहण और मुआवजे के नियमों को ताक पर रखकर बना दी सड़क, जिला प्रशासन मौन
रमेश चन्द डाड

आकोला/बिगोद, 13 जून।स्मार्ट हलचल।बिगोद कस्बे से होकर गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 758 (NH-758) पर एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों की घोर लापरवाही एवं मनमानी का नमूना स्पष्ट नजर आ रहा है। पिछले 10 वर्षों से इस मुख्य राजमार्ग पर निर्माण कार्य को अधूरा छोड़ रखा है। बिगोद बस स्टैंड से करीब 200-300 मीटर तक राजमार्ग की जगह डामर की सड़क बनाने के बजाय केवल मिट्टी डालकर छोड़ रखा है, जिससे उड़ती धूल के बीच सारे वाहन गुजर रहे हैं।

सड़क के बीच खड़े बिजली के पोल दे रहे हादसों को न्योता:

राजमार्ग बनाने से पूर्व विभाग द्वारा विद्युत लाइन को भी शिफ्ट नहीं किया गया। वर्तमान में चालू हालत में खड़े विद्युत पोलों और लोहे की कैंचियों के बीच से ही हाईवे का ट्रैफिक गुजर रहा है, जो किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। इसके साथ ही, भीलवाड़ा की अतिमहत्वाकांक्षी चंबल परियोजना की लाइन एवं कस्बे की पेयजल लाइन को भी सड़क निर्माण के दौरान मलबे के नीचे काफी नीचे दबा दिया गया है।

बिना भू-अधिग्रहण और मुआवजे के बना दी सड़क:
स्थानीय भू-स्वामियों का कहना है कि करीब एक दशक पूर्व बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के मनमाने तरीके से नियमों को ताक में रखकर यह राजमार्ग निकाल दिया गया। रोड के दोनों साइड में 60-70 वर्ष पूर्व बनी वैध बिल्डिंगों का न तो भू-अधिग्रहण किया गया और न ही मकान मालिकों को कोई मुआवजा दिया गया। सड़क को जमीनी लेवल से काफी ऊंचा बना दिया गया है, जिससे बारिश के दिनों में कस्बावासियों को जलभराव की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पानी निकासी के लिए प्रस्तावित सीमेंटेड नाले भी आधे-अ अधूरे पड़े हैं।

एक ओर सड़क सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए सुप्रीम कोर्ट का राजमार्गों के प्रति गंभीर रुख नजर आ रहा है, वहीं दूसरी ओर अधिकारी और प्रशासन आंखें मूंदे इस राजमार्ग की व्यथा पर मौन धारण किए हुए हैं। राजमार्ग की यह सकड़ाई खुलेआम दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रही है, किंतु प्राधिकरण बिना काम पूरा किए लगातार टोल वसूली कर रहा है, जिसके विरुद्ध क्षेत्रवासियों ने कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।