कर्म का सिद्धांत अटल, भगवान को भी भुगतना पड़ता है फल: आचार्य विहर्ष सागर महाराज

अनिल कुमार

ब्यावर।स्मार्ट हलचल।संसार में लोग अलग-अलग धर्म, जाति और परंपराओं से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन कर्म का सिद्धांत सभी के लिए समान है। कर्म कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करता और प्रत्येक व्यक्ति को अपने किए का फल भुगतना ही पड़ता है। यह विचार परम पूज्य आचार्य श्री 108 विहर्ष सागर जी महाराज ने ब्यावर में आयोजित जैन समाज की धर्मसभा में व्यक्त किए।
भगवान ऋषभदेव के प्रसंग से दी सीख
आचार्य श्री ने कर्म की अटलता को समझाते हुए भगवान ऋषभदेव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब लोगों की शिकायत पर भगवान ऋषभदेव ने बैलों के मुख पर जाली बांधने की सलाह दी थी, तो उसी कर्म के उदय के कारण उन्हें स्वयं 13 माह और 9 दिन तक आहार प्राप्त नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि जब कर्म का प्रभाव भगवान तक को नहीं छोड़ता, तो सामान्य मनुष्य की क्या बिसात। इसलिए हर व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सदैव सजग रहना चाहिए।

एक ही बालक ऐसे बना ‘श्रीकृष्ण’ और ‘कंस’
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने एक प्रेरक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि एक चित्रकार ने जिस तेजस्वी बालक को देखकर भगवान श्रीकृष्ण का चित्र बनाया था, वही बालक 25 साल बाद गलत संगति और बुरे कर्मों के कारण इतना क्रूर हो गया कि चित्रकार ने कंस के चित्र के लिए उसे ही मॉडल चुना। आचार्य श्री ने कहा, “इंसान और शैतान दोनों हमारे भीतर ही मौजूद हैं। हमारे विचार और कर्म ही तय करते हैं कि हम देवत्व की ओर जाएंगे या पतन की ओर।”
दर्पण है संसार का सबसे बड़ा ग्रंथ
आचार्य श्री ने ‘दर्पण’ (शीशे) को संसार का सबसे सहज और बड़ा ग्रंथ बताते हुए कहा कि दर्पण बिना किसी भेदभाव, राग या द्वेष के सबको उसकी वास्तविकता दिखाता है। वह सबका स्वागत करता है पर किसी का संग्रह नहीं करता। मनुष्य को भी दर्पण की तरह निष्पक्ष और समभावी बनना चाहिए।

दान केवल धन का नहीं होता: मुनि विजयेश सागर
इस अवसर पर आचार्य श्री के शिष्य मुनि श्री विजयेश सागर जी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दान केवल धन का नहीं, बल्कि समय, सेवा, ज्ञान और सद्भाव का भी होता है। निष्काम भाव से किया गया दान मनुष्य के अहंकार को कम करता है और पुण्य का संचय करता है।
चित्र अनावरण और पाद प्रक्षालन
धर्मसभा की शुरुआत में दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष सुशील बड़जात्या एवं समाज के प्रबुद्ध जनों द्वारा आचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज एवं आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के चित्रों का अनावरण किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद लिया। प्रवक्ता राकेश जैन ने बताया कि चातुर्मास के तहत प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय व बाहर से आए श्रद्धालु मंगल सान्निध्य का लाभ ले रहे हैं।