आसींद के स्वर्णकार भागीरथ सोनी का कमाल: चांदी के हेलीकॉप्टर के बाद अब गढ़ दी ‘चांदी की जेसीबी’

(महेन्द्र नागौरी)

32 घंटे की अथक मेहनत से तैयार की अनूठी कलाकृति, कला और हुनर की हो रही जमकर सराहना

भीलवाड़ा  स्मार्ट हलचल।प्रतिभा और हुनर किसी पहचान के मोहताज नहीं होते। यह बात एक बार फिर आसींद के युवा स्वर्णकार कलाकार भागीरथ सोनी ने साबित कर दिखाई है। अपनी बेमिसाल कारीगरी और रचनात्मक सोच के लिए पहचाने जाने वाले ‘मातेश्वरी वर्क आर्ट’ के संचालक भागीरथ सोनी ने इस बार शुद्ध चांदी से एक बेहद आकर्षक और बारीक नक्काशी वाली जेसीबी मशीन तैयार कर सभी को हैरत में डाल दिया है।
ग्राहक की विशेष मांग पर तैयार की गई यह अनूठी चांदी की जेसीबी न केवल कला का उत्कृष्ट नमूना है, बल्कि स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा और सृजनशीलता का भी शानदार उदाहरण बन गई है। इस कलाकृति को तैयार करने में भागीरथ सोनी ने लगातार 32 घंटे की मेहनत की, जबकि इसके निर्माण में करीब 57 हजार 500 रुपये की लागत आई है।
बारीक कारीगरी ने बनाया आकर्षण का केंद्र
चांदी से निर्मित इस जेसीबी मॉडल में मशीन के हर हिस्से को बेहद बारीकी और वास्तविकता के साथ उकेरा गया है। इसकी डिजाइन, संरचना और फिनिशिंग इतनी आकर्षक है कि देखने वाला पहली नजर में ही कलाकार की कारीगरी का कायल हो जाता है। जेसीबी तैयार होने के बाद यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब पसंद की जा रही हैं।
पहले भी बना चुके हैं कई अनूठी कलाकृतियां
यह पहला मौका नहीं है जब भागीरथ सोनी ने अपनी कला से लोगों को चौंकाया हो। इससे पूर्व भी वे ग्राहकों की मांग पर चांदी का हेलीकॉप्टर, मोटरसाइकिल, मोबाइल कवर, तलवार, मुकुट, छतर, घोड़े, हनुमानजी के गोटे, टेम्पू सहित विभिन्न प्रकार की आकर्षक मूर्तियां और कलात्मक मॉडल तैयार कर चुके हैं। उनकी बनाई गई कलाकृतियां न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी काफी सराही जाती हैं।
स्थानीय प्रतिभा को मिल रही नई पहचान
भागीरथ सोनी की यह अनूठी रचना एक बार फिर साबित करती है कि छोटे कस्बों और शहरों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उसे मंच और पहचान देने की है। उनकी कला न केवल आसींद का नाम रोशन कर रही है, बल्कि युवा कारीगरों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
हुनर ऐसा कि चांदी में ढाल दी जेसीबी, अब हर कोई कह रहा—‘वाह भागीरथ, क्या कमाल कर दिया!’