करोड़ों का काम या गोपनीय परियोजना? पीपलूंद बाईपास निर्माण से ‘पारदर्शिता गायब’, बिना सूचना बोर्ड के चल रहा खेल
जहाजपुर, 20 जून 2026। जहाजपुर क्षेत्र के पीपलूंद गांव में निर्माणाधीन बाईपास सड़क परियोजना एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। जहां एक ओर सड़क निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, वहीं दूसरी ओर पूरे निर्माण स्थल पर कहीं भी परियोजना संबंधी ‘सूचना बोर्ड’ नजर नहीं आ रहा है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और निर्माण कार्य की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस बाईपास निर्माण में पहले ही चारागाह भूमि से अवैध मिट्टी उत्खनन और हजारों पेड़ उखाड़ने को लेकर शिकायतें चल रही हैं। अब सूचना बोर्ड नहीं होने से लोगों के मन में और अधिक शंकाएं पैदा हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये की परियोजना पर कार्य सार्वजनिक धन से किया जा रहा है, तो जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सड़क कितनी लागत से बन रही है और इसका ठेकेदार कौन है?
क्या कहते हैं सरकारी नियम और मानक?
सार्वजनिक निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्माण स्थल पर स्पष्ट एवं स्थायी सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होता है। इस बोर्ड पर मुख्यतः निम्न जानकारियां अंकित होनी जरूरी हैं:
1. परियोजना का नाम और स्वीकृत लागत राशि।
2. निर्माण एजेंसी/ठेकेदार का नाम तथा कार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथि।
3. संबंधित विभाग का नाम और तकनीकी स्वीकृति का विवरण।
4. गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा मानक (बैरिकेडिंग, रात्रि संकेतक) एवं निगरानी अधिकारियों के नाम।
5. आमजन की शिकायत एवं सुझाव के लिए संपर्क जानकारी।
ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग:
पीपलूंद के प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगवाया जाए और परियोजना से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएं। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की जा रही सामग्री और नियमों के पालन की स्वतंत्र तकनीकी जांच भी कराई जाए ताकि जनता के पैसे का दुरुपयोग रोका जा सके।
