व्यापार,किसान संगठनों,विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं को बंद में समर्थन देने की अपील
शाहपुरा@(किशन वैष्णव)शाहपुरा में जिला संघर्ष समिति द्वारा जिला बहाली की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जिला संघर्ष समिति के अध्यक्ष दुर्गा लाल राजोरा के नेतृत्व में 28 फरवरी को स्वैच्छिक बंद का आह्वान किया गया है तथा इस दिन प्रशासन को 9वां स्मरण पत्र सौंपा जाएगा। संघर्ष समिति के महासचिव कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि व्यापार मंडल, किसान संगठनों, विभिन्न गांवों के प्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं ने बंद को समर्थन देने की बात कही है।आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि आश्वासन के बावजूद जिले की बहाली नहीं होने से जनता में गहरा असंतोष है, इसलिए अब सामूहिक रूप से आवाज बुलंद की जाएगी।
152 दिन चला उपखंड कार्यालय के बाहर क्रमिक अनशन
इस आंदोलन का सबसे लंबा और ऐतिहासिक चरण वह रहा जब उपखंड कार्यालय के बाहर लगातार 152 दिनों तक क्रमिक अनशन चला। इस दौरान अलग-अलग गांवों के ग्रामीण, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, युवा और महिलाएं बारी-बारी से अनशन में शामिल हुए। आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसमें जनभागीदारी उल्लेखनीय रही। प्रतिदिन धरना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते रहे और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते रहे। यह अनशन क्षेत्र की जनता के धैर्य और संघर्ष का प्रतीक बन गया।
अब तक 8 स्मरण पत्र सौंपे, 28 को दिया जाएगा 9वां ज्ञापन।
संघर्ष समिति अध्यक्ष के अनुसार आंदोलन के दौरान प्रशासन को अब तक कुल 8 स्मरण पत्र सौंपे जा चुके हैं। प्रत्येक स्मरण पत्र में लंबित मांगों के समाधान के लिए समयबद्ध कार्यवाही की मांग की गई। संघर्ष समिति का कहना है कि ज्ञापन और स्मरण पत्र देने के बावजूद ठोस कार्यवाही नहीं हुई। अब 28 फरवरी को 9वां स्मरण पत्र सौंपकर जिले के मांग को लेकर शाहपुरा स्वैच्छिक बंद रखा जाएगा।
“मुख्यमंत्री के आश्वासन पर स्थगित हुआ था आंदोलन”
152 दिन तक चले क्रमिक अनशन के बाद जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा, तब मुख्यमंत्री स्तर से सकारात्मक आश्वासन मिलने की बात कही गई। आंदोलनकारियों ने विश्वास जताते हुए आंदोलन को स्थगित कर दिया था, इस उम्मीद के साथ कि शीघ्र समाधान होगा। लेकिन समय बीतने के बाद भी जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं दिखे, जिससे जनता में फिर से नाराजगी बढ़ी है।
“फूलडोल महोत्सव में लगेगी जिला बहाली, विकास और संघर्ष की विशेष प्रदर्शनी”
संघर्ष समिति के महासचिव कमलेश मुंडेतिया ने बताया कि प्रसिद्ध फूलडोल महोत्सव के दौरान एक अस्थायी स्टॉल लगाकर विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। इस प्रदर्शनी में विस्तार से बताया जाएगा कि शाहपुरा भौगोलिक और आर्थिक दृष्टि से जिला बनने योग्य है। नक्शों, आंकड़ों और दस्तावेजों के माध्यम से यह दर्शाया जाएगा कि प्रशासनिक दृष्टि से शाहपुरा की स्थिति सुदृढ़ है तथा यहां जिला मुख्यालय बनने के सभी मानक उपलब्ध हैं।
प्रदर्शनी में यह भी समझाया जाएगा कि जिला बनने से आमजन को प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, स्थानीय स्तर पर सरकारी कार्यालय स्थापित होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, व्यापार और उद्योग को गति मिलेगी, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिलेगी।
साथ ही संघर्ष समिति द्वारा किए गए 152 दिन के क्रमिक अनशन, 8 स्मरण पत्रों, विभिन्न चरणों में हुए आंदोलनों और जनसमर्थन की झलकियां फोटो, दस्तावेजों और विवरण के माध्यम से प्रदर्शित की जाएंगी। उद्देश्य यह है कि आमजन को पूरे संघर्ष की जानकारी मिले और जिला बहाली की मांग के समर्थन में व्यापक जनमत तैयार हो सके।
“फिर तेज हुआ जनआंदोलन, 28 फरवरी पर टिकी सबकी नजर”
अब 28 फरवरी को प्रस्तावित स्वैच्छिक बंद और 9वें स्मरण पत्र के जरिए आंदोलन को नई दिशा देने की तैयारी है। संघर्ष समिति का कहना है कि उनका उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि जनहित की मांगों का समाधान है। यदि इस बार भी ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आगे की रणनीति और अधिक व्यापक हो सकती है। पूरे क्षेत्र की निगाहें अब 28 फरवरी पर टिकी हैं, जब जनता एक बार फिर अपनी एकजुटता और संघर्ष की ताकत दिखाएगी।










