ब्यावर में ‘अब्दुल रहमान बनाम सरकार’ फैसले की उड़ रही धज्जियां: बिचडली तालाब के डूब क्षेत्र में भू-माफियाओं का कब्जा, कांग्रेस विधि विभाग ने एडीएम को सौंपा ज्ञापन

ऐतिहासिक परकोटा तोड़ने और भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ के गंभीर आरोप; गरीबों को मोहरा बनाकर काटी जा रही हैं अवैध कॉलोनियां

अनिल कुमार

ब्यावर।स्मार्ट हलचल।शहर के ऐतिहासिक बिचडली तालाब के अस्तित्व को भू-माफियाओं द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से समाप्त करने के विरोध में मंगलवार को वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल सड़कों पर उतरा। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (विधि, आरटीआई एवं मानवाधिकार विभाग) के प्रदेश सचिव, पार्षद एवं एडवोकेट घनश्याम फुलवारी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक शिष्टमंडल ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर (एडीएम) ब्रह्म लाल जाट से मुलाकात की। शिष्टमंडल ने मुख्यमंत्री और संभागीय आयुक्त अजमेर के नाम ज्ञापन सौंपकर तालाब के कैचमेंट एरिया (जलागम क्षेत्र) को भू-माफियाओं से मुक्त कराने और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

हाईकोर्ट के आदेश और बफर जोन की खुल्लम-खुल्ला अवहेलना
एडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में एडवोकेट घनश्याम फुलवारी ने राजस्थान हाई कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले “अब्दुल रहमान बनाम राजस्थान सरकार (याचिका संख्या 1536/2003)” का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि 2 अगस्त 2004 के इस फैसले के तहत कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि नदी, नाले, झील और तालाबों के बहाव क्षेत्र में 15 अगस्त 1947 की स्थिति बहाल की जाए और बफर जोन (जलागम क्षेत्र के केंद्र से 50 मीटर दूरी) के भीतर किसी भी निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध रहे। अजमेर की आना सागर, फाई सागर और राजसमंद झील से इसी आदेश के तहत अतिक्रमण हटाए गए थे, लेकिन ब्यावर में इस कानून की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

खातेदार खुद मान चुके हैं ‘डूब क्षेत्र’, फिर भी पट्टों के लिए आवेदन
ज्ञापन में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया कि नगर परिषद द्वारा 23 मई 2024 को जारी एक लोक सूचना के अनुसार, जय नारायण त्रिपाठी (पुत्र गोविंद नारायण त्रिपाठी) ने खसरा संख्या 1476, 1477 और 1479 की खातेदारी भूमि पर पट्टों के लिए आवेदन किया है। जबकि यह वही क्षेत्र है जहाँ कुछ साल पहले तक तालाब का पानी भरा रहता था।

हैरानी की बात यह है कि स्वयं गोविंद नारायण त्रिपाठी ने 4 मार्च 2022 को नगर परिषद को एक नोटिस भेजकर यह कबूल किया था कि उनके खेत में तालाब का पानी आ जाता है जिससे उनके पेड़ नष्ट हो गए और पानी रोकने के लिए उन्हें मिट्टी डलवानी पड़ी। जब खातेदार खुद इसे डूब क्षेत्र मान रहे हैं, तो प्रशासन वहां पट्टे देने की तैयारी कैसे कर सकता है?

रास्ते के लिए तोड़ा ऐतिहासिक परकोटा, साठगांठ का खेल
एडवोकेट फुलवारी ने आरोप लगाया कि अवैध कॉलोनी के लिए रास्ता निकालने के उद्देश्य से शहर का ऐतिहासिक परकोटा तक तोड़ दिया गया। इस खेल में पार्षद पुत्र अमित प्रजापत को मोहरा बनाया गया और प्रजापत समाज को 119 गज जमीन बतोर गिफ्ट (12 अक्टूबर 2023) दी गई, जिसके बाद वहां नियमों के विरुद्ध 300 वर्गगज से ज्यादा का निर्माण कर लिया गया। हालांकि, बार-बार की शिकायतों के बाद प्रशासन ने सुध लेते हुए परकोटे की दीवार का पुनर्निर्माण तो करवा दिया, लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की दोहरी नीति: जहाँ ‘सेटिंग’ नहीं हुई, वहाँ चली जेसीबी
शिष्टमंडल ने नगर परिषद द्वारा पिछले दिनों खसरा संख्या 1447 से अवैध मिट्टी हटाने की कार्रवाई का स्वागत किया, लेकिन साथ ही प्रशासन की नीयत पर सवाल भी उठाए। फुलवारी ने कहा, “पिछले 6 वर्षों से मैं लगातार भू-माफियाओं के खिलाफ शिकायतें दे रहा हूँ, लेकिन कार्रवाई केवल खसरा संख्या 1447 पर हुई। इससे साफ है कि जहाँ अधिकारियों की साठगांठ नहीं हो पाई, वहाँ की भर्ती निकाल दी गई और जहाँ मोटी साठगांठ है, वहाँ पटवारी, तहसील कार्यालय और सिंचाई विभाग आंख बंद करके NOC बांट रहे हैं।”

यह भी आरोप लगाया गया कि 14 मई 2024 को नगर परिषद ने इस डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण हटाने के चेतावनी बोर्ड लगाए थे और लाउडस्पीकर से मुनादी करवाई थी। लेकिन महज 4-5 दिनों में ही अधिकारियों ने भू-माफियाओं से मिलकर उन बोर्ड्स को ही गायब करवा दिया, जिससे भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद हो गए।

भू-माफिया कमा रहे चांदी, गरीब जनता पर मंडराया संकट
अधिवक्ताओं ने कहा कि रजिस्ट्रार कार्यालय भी इन अवैध जमीनों की धड़ल्ले से रजिस्ट्रियां कर रहा है और भारी राजस्व वसूल रहा है। जब माफिया तालाब में मिट्टी भर रहे थे और गरीब लोग लोन लेकर मकान बना रहे थे, तब प्रशासन सोया हुआ था। आज उन गरीबों को बेदखल करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। शिष्टमंडल ने मांग की कि बेदखली के बजाय उन भ्रष्ट अधिकारियों से हर्जाना वसूला जाना चाहिए जिनकी नाक के नीचे यह अवैध निर्माण हुए।

शिष्टमंडल में ये रहे उपस्थित
बिचडली तालाब के अस्तित्व की रक्षा के लिए सौंपे गए इस ज्ञापन के दौरान विधि विभाग के जिला सचिव एडवोकेट सुनील सिंगाड़िया, जिला सचिव एडवोकेट सुलक्षणा शर्मा, एडवोकेट राजेश बंसल और एडवोकेट सचिव शाबिर खान सहित कई कानूनविद उपस्थित थे।