मूलचन्द पेसवानी
स्मार्ट हलचल।शाहपुरा पुलिस थाना क्षेत्र के उपतहसील मुख्यालय ढीकोला में कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीती रात अज्ञात चोरों ने जिस दुस्साहस के साथ 80 वर्षीय बुजुर्ग रामपाल चेचाणी के घर धावा बोला, उसने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। यह सिर्फ चोरी की कोशिश नहीं थी, बल्कि यह उस भयावह सच का आईना है जिसमें अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और सुरक्षा व्यवस्था मानो गहरी नींद में सोई हुई है।
रात के सन्नाटे में चोर चोरी की नियत से रामपाल चेचाणी के मकान में घुसे। लेकिन जैसे ही घर के मालिक रामपाल चेचाणी की नींद खुली और उन्होंने शोर मचाना शुरू किया, चोरों ने मानवता की सारी सीमाएं लांघ दीं। आरोप है कि चोरों ने धारदार हथियार से 80 वर्षीय बुजुर्ग के सिर पर प्राणघातक वार कर दिया। लहूलुहान हालत में भी बुजुर्ग की आवाज गांव तक पहुंची और ग्रामीण तुरंत मौके पर जमा हो गए। इसके बाद पूरी रात ग्रामीणों ने आसपास के क्षेत्रों में चोरों का पीछा किया, तलाश अभियान चलाया, लेकिन चोर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
यह घटना सिर्फ एक परिवार पर हमला नहीं, बल्कि पूरे ढीकोला की सुरक्षा व्यवस्था पर जोरदार तमाचा है।
सुबह होते-होते ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि पहले रामपाल चेचाणी के घर पहुंचे, हालात देखे और उसके बाद सीधे ढीकोला पुलिस चौकी पहुंचकर प्रदर्शन किया। लेकिन यहां जो दृश्य सामने आया, उसने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया—पुलिस चौकी पर कोई कार्मिक मौजूद नहीं मिला।
ग्रामीणों का आरोप है कि रात में चोरी और हमले की सूचना देने के बावजूद सुबह तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। सवाल यह है कि जब अपराधी गांव में खुलेआम हमला कर रहे हों, तब पुलिस आखिर है कहां?
ग्रामीणों का कहना है कि ढीकोला जैसी बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में लंबे समय से गश्त की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। चौकी में नियुक्त स्टाफ को भी अक्सर पुलिस थाने के अन्य कार्यों में लगा दिया जाता है, जिसके कारण चौकी लगभग खाली रहती है। परिणाम यह है कि ढीकोला आज अपराधियों के लिए आसान निशाना बन चुका है।
गांववालों का आक्रोश इसलिए भी बढ़ा हुआ है क्योंकि यह कोई पहली घटना नहीं है। आरोप है कि पिछले दो वर्षों में ढीकोला क्षेत्र में करीब 50 चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन आज तक एक भी मामले का खुलासा नहीं हुआ। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
तीन दिन पहले ही ओमप्रकाश वैष्णव की बाइक चोरी हुई थी। ग्रामीणों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज में चोर बाइक ले जाते साफ दिखाई दे रहा है। फोटो और वीडियो पुलिस को सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक न मुकदमा दर्ज हुआ और न ही आरोपी गिरफ्तार हुए। यदि सीसीटीवी में चेहरा होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती, तो फिर आमजन न्याय की उम्मीद किससे करे?
पूर्व सरपंच गणपत खटीक ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ढीकोला में पुलिस लंबे समय से उदासीन बनी हुई है। चोरी, मारपीट और अन्य अपराधों के बावजूद कार्रवाई का अभाव अपराधियों के हौसले बढ़ा रहा है।
कांग्रेस मंडल अध्यक्ष मनीष नायक ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कार्रवाई जानबूझकर नहीं की जा रही। उनका कहना है कि चौकी का पूरा जाब्ता थाने में लगा दिया गया है और ढीकोला को रामभरोसे छोड़ दिया गया है। उनका आरोप है कि पुलिस की निष्क्रियता ने गांव में अपराध और नशे के नेटवर्क को मजबूत किया है।
दूसरी ओर भाजपा के विधानसभा संयोजक सुरेश भाट ने भी इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि चोरी की वारदात ने ग्रामीणों को सदमे में डाल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ढीकोला में अवैध नशे का कारोबार तेजी से फैल रहा है। शराब, स्मैक और गांजे का बढ़ता जाल अपराधों की जड़ बनता जा रहा है। पुलिस को बार-बार सूचना देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बढ़ते नशे के कारण अपराधियों की नई जमात तैयार हो रही है। शराबी, स्मैकिए और गांजेड़ी अब चोरी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जब नशा खुलेआम बिके और कानून मौन रहे, तब अपराध बढ़ना स्वाभाविक है।
सबसे चिंताजनक आरोप यह भी है कि रात में फोन करने पर चौकी स्टाफ कॉल तक नहीं उठाता। कई जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सूचना देने के बावजूद पुलिस समय पर नहीं पहुंचती। यदि आपात स्थिति में भी पुलिस प्रतिक्रिया न दे, तो चौकी की उपयोगिता पर प्रश्न उठना लाजिमी है।
ग्रामीणों ने मौके पर ही पुलिस अधीक्षक Sagar Rana से फोन पर बात कर पूरे मामले की जानकारी दी। एसपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लेकिन ग्रामीण अब केवल आश्वासन नहीं, परिणाम चाहते हैं।
एसपी के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी साफ है—यदि चोरी की घटनाओं का खुलासा नहीं हुआ, गश्त व्यवस्था नहीं सुधरी और पुलिस चौकी सक्रिय नहीं हुई, तो ग्रामीण धरना, प्रदर्शन और रोड जाम करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
ढीकोला की यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है—क्या आम नागरिक अब अपनी सुरक्षा खुद करने को मजबूर है? जब बुजुर्ग भी अपने घर में सुरक्षित नहीं, जब चौकी खाली है, जब शिकायत पर कार्रवाई नहीं, तब व्यवस्था पर भरोसा कैसे कायम रहे?
कानून का डर अपराधियों में होना चाहिए, लेकिन ढीकोला की तस्वीर उलटी दिखाई दे रही है। यहां डर अब आम आदमी के मन में है और बेखौफ अपराधी रातों में घूम रहे हैं।
यदि पुलिस अब भी नहीं चेती, तो यह सिर्फ ढीकोला का संकट नहीं रहेगा; यह पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी साबित होगा। अब समय आ गया है कि प्रशासन कागजी आश्वासनों से आगे बढ़कर जमीनी कार्रवाई करे—वरना जनता का धैर्य जवाब देने में देर नहीं लगेगी।
