(पंकज पोरवाल)
गूंजे भगवान विष्णु के जयकारे, ग्यारस माता मंदिर, चारभुजा नाथ बडा मंदिर, खाटूश्याम मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
भीलवाड़ा।स्मार्ट हलचल।ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की पावन निर्जला एकादशी के अवसर पर गुरुवार को भीलवाड़ा शहर सहित जिले भर के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रातःकाल से ही ग्यारस माता मंदिर, चारभुजा नाथ बडा मंदिर, खाटूश्याम मंदिरों में भगवान श्रीहरि विष्णु के जयकारों, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हो गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि एवं देश की खुशहाली की कामना की। शहर का प्रसिद्ध ग्यारस माता मंदिर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का केंद्र बना रहा। प्रातःकाल से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान श्रीहरि विष्णु एवं ग्यारस माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर ग्यारस माता के दर्शन किए और मंगल गीत गाए, जिससे मंदिर परिसर का माहौल अत्यंत भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रबंधन द्वारा दर्शन एवं व्यवस्थाओं के विशेष प्रबंध किए गए। मंदिर परिसर में शीतल पेयजल, छाया एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। दिनभर दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा और देर शाम तक मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं। चारभुजा नाथ बडा मंदिर के पंडित विकास व मनीश पाराशर ने बताया की निर्जला एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित वर्ष की सर्वाधिक पुण्यदायी एकादशियों में माना जाता है, जिसके कारण मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। मंदिर में सुबह से ही भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ एवं आरती का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु को तुलसी दल, पुष्प एवं फल अर्पित कर विधिवत पूजा की। दर्शन के लिए लगी लंबी कतारों के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। कई श्रद्धालुओं ने निर्जल व्रत रखकर धर्म एवं आस्था के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। चारभुजा नाथ बडा मंदिर में दर्शन करने पहुंची श्रद्धालु चंद्रा तोषणीवाल व प्रिति काल्या ने कहा कि निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर है। उन्होंने बताया कि इस दिन दर्शन और पूजा करने से मन को शांति एवं आध्यात्मिक संतोष मिलता है। वे प्रतिवर्ष निर्जला एकादशी पर व्रत रखकर मंदिर में दर्शन करने आते हैं और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।
