हार्ट प्रॉब्लम्स से सांस फूलने की समस्या क्यों होती है?
हार्ट और फेफड़े मिलकर पूरे शरीर में ऑक्सीजन वाला ब्लड सप्लाई करते हैं। जब हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, या वाल्व डिसऑर्डर जैसी कंडीशंस होती है तो हार्ट कमजोर हो जाता है या डैमेज हो जाता है। इस स्थिति में हार्ट ब्लड को ठीक से पंप नहीं कर पाता है। इस वजह से, ब्लड फेफड़ों में वापस चला जाता है, जिससे पानी जमा होने लगता है और फेफड़ों की ऑक्सीजन एक्सचेंज करने की क्षमता कम हो जाती है।
सीधे लेटने पर क्यों फूलती हैं सांसे
हार्ट से जुड़ी समस्या के मरीजों को अक्सर फिजिकल एक्टिविटी के दौरान सांस फूलने की शिकायत होती है, क्योंकि मेहनत के दौरान शरीर को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। जैसे-जैसे हार्ट का काम बिगड़ता है, चलने, कपड़े पहनने या बात करने जैसी रोजाना की एक्टिविटी में भी सांस फूलने लगती है। कई लोगों को सीधे लेटने पर भी सांस लेने में दिक्कत होती है, इस कंडीशन को ऑर्थोपनिया कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लेटने से दिल और फेफड़ों में खून का फ्लो बढ़ जाता है, जिससे कंजेशन और बढ़ जाता है। कुछ मरीज रात में अचानक सांस लेने के लिए हांफते हुए जाग जाते हैं, इस लक्षण को पैरोक्सिस्मल नॉक्टर्नल डिस्पेनिया कहते हैं।
लगातार सांस फूलने को उम्र बढ़ने, फिटनेस की कमी या स्ट्रेस मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, खासकर जब इसके साथ थकान, पैरों में सूजन या एक्सरसाइज करने की क्षमता कम हो। शुरुआती जांच से असली कारण का पता लगाने और हार्ट की गंभीर बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है।
सीने में दर्द और सांस फूलने का लक्षण
सीने में दर्द, सांस फूलना और हार्ट की धड़कन तेज या तेज होने का एहसास अक्सर एक साथ होता है और यह दिल की गंभीर समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसका एक आम कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज है, जिसमें सिकुड़ी हुई आर्टरीज हार्ट की मांसपेशियों में ब्लड का बहाव कम कर देती हैं। इससे सीने में दर्द या दबाव बढ़ने लगता है, खासकर फिजिकल एक्टिविटी के दौरान, साथ ही सांस लेने में तकलीफ भी हो सकती है।
एरिथमिया हो सकता है कारण
हार्ट रिदम डिसऑर्डर, जिसे एरिथमिया कहते हैं, भी इन लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी स्थितियों में हार्ट ठीक से ब्लड पंप नहीं कर पाता है, ऐसे में व्यक्ति को दिल की धड़कने तेज होना, चक्कर आना, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण महसूस होते हैं। वाल्व की बीमारियां, खासकर माइट्रल वाल्व या एओर्टिक वाल्व से जुड़ी परेशानी, नॉर्मल ब्लड सर्कुलेशन में रुकावट डाल सकती हैं और हार्ट पर भी ज्यादा दबाव डाल सकती हैं।
हार्ट फेलियर के संकेत में सांस फूलना
हार्ट फेलियर भी सांस फूलने का एक बड़ा कारण हो सकता है। जब दिल की पंपिंग कैपेसिटी कम हो जाती है, तो फेफड़ों और शरीर के टिशू में फ्लूइड जमा हो जाता है, जिससे सांस फूलने और सूजन होने लगती है। जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है, मरीजों को सीने में भारीपन और हार्ट की धड़कन अनियमित महसूस हो सकती है।
एंग्जायटी और लंग्स इंफेक्शन
हालांकि, एंग्जायटी, सांस के इन्फेक्शन और फेफड़ों की बीमारियों से भी ऐसे ही लक्षण हो सकते हैं, लेकिन सीने में दर्द, सांस फूलने या हार्ट की धड़कन से जुड़ी समस्या के बार-बार होने वाले एपिसोड की हमेशा मेडिकल जांच करवानी चाहिए। तुरंत डायग्नोसिस से गंभीर स्थितियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है, इससे पहले कि वे जानलेवा बन जाएं।
सांस फूलने को कब नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
हालांकि, सांस फूलने की समस्या कई नुकसान न पहुंचाने वाले कारणों से भी हो सकती है, लेकिन कुछ संकेतों पर तुरंत मेडिकल मदद लेने की जरूरत होती है। सांस लेने में तकलीफ जो अचानक शुरू होती है, तेजी से बिगड़ने लगती है, या आराम करते समय भी होती है, वह दिल या फेफड़ों की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है। अगर सांस फूलने के साथ सीने में दर्द, दबाव, चक्कर आना, बेहोशी, बहुत ज्यादा पसीना आना, या जबड़े गर्दन और हाथ में दर्द हो, तो बिना देर किए इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
सीढ़ियां चढ़ते हुए सामान्य तौर पर सांस फूलना पूरी तरह नाॅर्मल होता है। जिन लोगों को रोजाना सीढ़ियां चढ़ने की आदत होती है, उनका स्टैमिना बेहतर होता है। इसलिए, उनमें सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने की समस्या कम दिखती है। हालांकि, ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जिनकी सीढ़ियां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। यहां एक सवाल जरूर उठता है कि क्या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने खराब फिटनेस का संकेत होता है या यह दिल की बीमारी से संबंधित है?
ऑर्थोपनिया क्यों होता है? जानें इसके कारण
डॉक्टर बताते हैं कि ‘हमारे पास अक्सर ऐसे बहुत से लोग आते हैं जिन्हें पता ही नहीं होता है कि उन्हें ऑर्थोपनिया की समस्या है। वह समझते हैं कि ऐसा दिनभर के काम करने और रेस्ट करने का समय न मिलने की वजह से हो रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है।’ आइए आपको ऑर्थोपनिया होने के कुछ आम कारणों के बारे में बताते हैं।
| ऑर्थोपनिया होने के कारण | विस्तार से समझें |
| 1. हार्ट फेल्योर | जब हार्ट सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों में तरल जमा होने लगता है। इसी की वजह से लेटते ही आपको चक्कर से आने लगते हैं। |
| 2. फेफड़ों की बीमारी | कभी-कभी अस्थमा, COPD या निमोनिया जैसी समस्याएं भी ऑर्थोपनिया का कारण बन सकती हैं। |
| 3. मोटापा | अगर आपका वजन अधिक है तो यह फेफड़ों पर दबाव डाल सकता है, इसलिए अपने वजन को कंट्रोल करें। |
| 4. स्लीप एपनिया | यह सोते समय सांस रुकने की समस्या होती है। |
| 5. एनीमिया या कमजोरी | जब शरीर में कमजोरी होती है या ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तो ऑर्थोपनिया हो सकता है। |
क्या ऑर्थोपनिया खतरनाक हो सकता है?
डॉक्टर इस सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं कि ‘हां, अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो ऑर्थोपनिया गंभीर हो सकता है। खासकर अगर इसका कारण हार्ट फेल्योर या फेफड़ों की बीमारी हो तो। लगातार सांस फूलना शरीर में ऑक्सीजन की कमी पैदा कर सकता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई मामलों में यह इमरजेंसी की स्थिति भी बन सकती है।
ऑर्थोपनिया का इलाज कैसे होता है?
डॉक्टर ने बताया कि ‘ऑर्थोपनिया का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। हम पेशेंट को कुछ टेस्ट जैसे एक्स-रे, ईसीजी, इको या ब्लड टेस्ट करवाने की सलाह दे सकते हैं।’ इलाज जिन कारणों पर निर्भर हो सकता है वह इस प्रकार हैं-
- हार्ट या फेफड़ों की दवाएं
- ऑक्सीजन थेरेपी
- वजन कम करना
- स्लीप एपनिया के लिए CPAP मशीन
- नमक और ज्यादा तेल वाला खाना कम करना
क्या इसे नेचुरली ठीक किया जा सकता है?
अगर समस्या शुरुआती स्तर पर हो, तो कुछ लाइफस्टाइल बदलाव राहत दे सकते हैं। जैसे आप सोते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखें, रोज हल्की एक्सरसाइज करें, वजन कंट्रोल में रखें, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाकर रखें, ज्यादा नमक और जंक फूड कम खाएं और साथ ही खूब पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।
लेकिन साथ ही डॉक्टर कहते हैं कि सिर्फ घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं है। अगर सांस फूलने की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं।
डॉक्टर के पास कब जाएं?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि जब आपको सांस लेने में अचानक बहुत ज्यादा दिक्कत महसूस होने लगे, सीने में दर्द हो, होंठ या उंगलियां नीली पड़ने लगें या तेज धड़कन और चक्कर आने लगे तो इसे इग्नोर न करें। ये संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं।
