स्मार्ट हलचल।दानवीर भामाशाह का जन्म 28 जून 1547 को रणथंम्भौर में हुआ था उनके पिता का नाम भारमल था जो ओसवाल जैन परिवार से थे और रणथंम्भौर के किलेदार थे ये मूलत सादड़ी गांव पाली जिले के निवासी थे।
भामाशाह का नाम दानवीरो की सूची में प्रथम माना जाता है”चूलिया”गांव के समीप”दोलाप”गांव में भामाशाह व उसके भाई ताराचंद ने महाराणा प्रताप से भेट कर सोने की अशर्फियां देकर महाराणा प्रताप की आर्थिक मदद की जिससे प्रताप ने25हजार सेना का12 वर्ष तक खर्च निर्वहन किया इस मदद के कारण भामाशाह को मेवाड़ का दानवीर या मेवाड़ का उद्धारक भी कहा जाता है।
हल्दीघाटी के युद्ध18 जून1576 में भामाशाह और उसके भाई ताराचंद ने भी राणा प्रताप की तरफ से भाग लिया था दिवेर के युद्ध 1582 में थी भामाशाह प्रताप के साथ थे।महाराणा प्रताप भामाशाह का बड़ा सम्मान करते थे उनके समय में ही राजधानी उदयपुर की पंच पंचायत,जाति भोज,सिंह पूजा आदि विशेष अवसरों पर भामाशाह को सर्वप्रथम तिलक करके सम्मान दिया जाता था यह परंपरा आज भी उनके मुख्य वंसज को प्राप्त है।
गोपीनाथ शर्मा के अनुसार भामाशाह के पूर्वज तथा स्वयं भामाशाह ने भी सेना की व्यवस्था का काम करते आए थे भामाशाह राज्य के खजाने को रखता था और युद्ध के दिनों में उसे छुपा कर रखने का रिवाज था जहां पर राशि रखी जाती थी उसका संकेत मंत्री स्वयं अपनी वही में रखते थे संभव है कि राजकीय द्रव्य जों छुपा कर रखा हुआ था लाकर भामाशाह ने दिया हो चुलिया गांव में मालवा आक्रमण से लूटा हुआ या दण्ड स्वरूप प्राप्त धन भामाशाह ने महाराणा प्रताप को समर्पित किया हो।
भामाशाह व ताराचंद वीर प्रकृति के थे महाराणा प्रताप ने महासहानी रामा के स्थान पर भामाशाह को अपना प्रधान बनाया था ताराचंद गोडवाड का हाकिम भी रहा था। और उस समय सादडी में रहता था उसने सादड़ी के बाहर एक बरायदारी और बावड़ी बनवाई थी।
महाराणा प्रताप के समय भामाशाह प्रधानमंत्री रहे महाराणा अमर सिंह के समय 3 वर्षों तक भामाशाह प्रधानमंत्री रहे 1600ई० में भामाशाह की मृत्यु हो गई तब उनके पुत्र जीवाशाह को महाराणा अमरसिंह ने प्रधानमंत्री बनाया यह मेवाड़ राज्य के दीवान रहे जीवाशाह मुगल युद्धो के दौरान राज्य की वित्तीय स्थिति का अच्छा प्रबंध किया जिससे महाराणा अमर सिंह को धन की कमी महसूस नहीं हुई मेवाड़ मुगल संधि1615 के समय युवराज कर्ण सिंह के साथ जीवाशाह अजमेर में जहांगीर के सम्मुख उपस्थित हुए महाराणा कर्णसिंह के शासनकाल(1620-1628) में जीवाशाह की मृत्यु के बाद कर्ण सिंह ने उनके पुत्र अक्षयराज को प्रधानमंत्री बनाया था इस प्रकार तीन पीढ़ियों तक भामाशाह का परिवार मेवाड़ की सेवा करता रहा शिक्षा विभाग के लिए जो व्यक्ति दान करता है उन व्यक्तियों को भामाशाह के रुप सम्मानित किया जाता है।
-राजेश कुमार मीना
करौली
