सचिवालय सेवा से IPS तक: 1989 में सरकारी नौकरी से शुरू हुआ लोकेश सोनवाल का सफर, संघर्ष और समर्पण ने दिलाई नई पहचान

मुख्यमंत्री के पीए रहे, फिर राजस्थान पुलिस सेवा में पहुंचे और अंततः भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का मुकाम हासिल किया

जयपुर/करौली। स्मार्ट हलचल।सरकारी सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव, प्रशासनिक कार्यशैली की गहरी समझ और पुलिसिंग में अनुशासन व सख्ती—यही पहचान है राजस्थान के आईपीएस अधिकारी लोकेश सोनवाल की। उनका करियर वर्ष 1989 में राजस्थान सचिवालय सेवा से शुरू हुआ। साधारण परिवार से निकलकर सरकारी सेवा में प्रवेश करने वाले सोनवाल ने मेहनत, लगन और ईमानदारी के दम पर एक-एक सीढ़ी चढ़ते हुए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक का सफर तय किया।

आर्थिक अभाव में बीते बचपन ने उन्हें कम उम्र में ही जिम्मेदारियों का एहसास करा दिया था। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने स्टेनोग्राफी और टाइपिंग सीखी और वर्ष 1989 में राजस्थान सचिवालय सेवा में नियुक्ति प्राप्त की। यही उनकी प्रशासनिक यात्रा की पहली सीढ़ी थी।

सचिवालय सेवा के दौरान उन्होंने अपनी कार्यकुशलता, अनुशासन और दक्षता से पहचान बनाई। इसी दौरान उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यालय में व्यक्तिगत सहायक (PA) के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री कार्यालय में रहते हुए उन्होंने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से समझा और नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया। यह अनुभव आगे चलकर उनके पूरे प्रशासनिक जीवन की मजबूत नींव बना।

हालांकि सचिवालय की नौकरी उनके लिए अंतिम मंजिल नहीं थी। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी और राजस्थान पुलिस सेवा (RPS) में चयनित होकर पुलिस विभाग में नई पारी शुरू की। पुलिस सेवा में उन्होंने विभिन्न जिलों और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनसुनवाई को प्राथमिकता दी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर निगम जयपुर में विजिलेंस कमिश्नर तथा अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के दौरान उन्होंने कई उल्लेखनीय कार्य किए। अतिक्रमण हटाने के अभियान, आपदा प्रबंधन, बाढ़ राहत कार्य, बोरवेल रेस्क्यू और संगठित अपराध के विरुद्ध अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। उनकी कार्यशैली सख्त लेकिन जनोन्मुखी मानी जाती है।

करौली में पुलिस अधीक्षक के रूप में उन्होंने अवैध खनन, नशे के कारोबार, सट्टा नेटवर्क और वांछित अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाए। आधुनिक तकनीक और खुफिया तंत्र के बेहतर उपयोग से कई बड़े मामलों का खुलासा हुआ और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई की गई।

वर्ष 2025 में केंद्र सरकार ने उनके लंबे अनुभव, उत्कृष्ट सेवा रिकॉर्ड और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए उन्हें राजस्थान पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नत किया। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।

तीन दशक से अधिक का अनुभव, एक ही संदेश

1989 में सचिवालय सेवा से शुरू हुआ यह सफर आज भारतीय पुलिस सेवा तक पहुंच चुका है। सचिवालय में प्रशासनिक अनुभव, मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्य, राजस्थान पुलिस सेवा में प्रभावी पुलिसिंग और अंततः आईपीएस बनने तक की यात्रा यह साबित करती है कि निरंतर मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी किसी भी व्यक्ति को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।