राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो: पूर्व मंत्री जाड़ावत

ओम जैन

शंभूपुरा। स्मार्ट हलचल।पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े समाचारों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि एसआईटी की रिपोर्ट में चढ़ावे के हिसाब-किताब, ऑडिट और प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए तथा जो भी दोषी हों, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
जाड़ावत ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं ने घर-घर जाकर चंदा दिया था। साथ ही विभिन्न स्तरों पर सरकारी संसाधनों का भी उपयोग हुआ। ऐसे में मंदिर से जुड़े प्रत्येक रुपये का हिसाब जनता और श्रद्धालुओं के सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि चंपत राय एवं अन्य जिन लोगों को मंदिर प्रबंधन और चढ़ावे की जिम्मेदारी सौंपी गई, उनके नाम यदि जांच रिपोर्टों में सामने आ रहे हैं तो यह अत्यंत गंभीर विषय है क्योंकि अभी और खुलासे के बाद बड़े नाम आने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 और 2024 के चुनावों में भाजपा ने भगवान राम के नाम पर व्यापक राजनीतिक प्रचार किया। पूरे देश में “जो राम को लाए हैं, हम उनको लाएंगे” जैसे गीत और नारों के माध्यम से वोट मांगे गए। भाजपा ने राम मंदिर को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर जनता से समर्थन प्राप्त किया, लेकिन आज यदि उसी राम मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो देशवासियों की भावनाएं आहत होना स्वाभाविक है।
प्रवक्ता नवरतन जीनगर ने बताया कि पूर्व राज्यमंत्री जाड़ावत ने कहा कि भगवान राम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए इस मामले को राजनीतिक प्रभाव से दूर रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ जांच की जानी चाहिए। श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान का एक-एक पैसा जनता की अमानत है और उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कि मामले की सच्चाई देश के सामने लाई जाए तथा दोषियों को किसी भी प्रकार का संरक्षण न दिया जाए, ताकि भगवान राम की आस्था पर कोई आंच न आए और नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।