अविनाश मीणा
घाड़ (देवली), टोंक|स्मार्ट हलचल।पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (इआरसीपी) के तहत नवनिर्मित कार्यों के सामाजिक प्रभाव आकलन के लिए चंदवाड़ में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। इस दौरान ठीकरियाकलां गांव के ग्रामीणों ने नहर निर्माण का विरोध दर्ज कराया।यह सामाजिक समाघात प्रभाव (सिया) अध्ययन ‘राजस्थान भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार नियम, 2016’ के तहत किया जा रहा है। यह प्रक्रिया ‘एनजीबीआई लिंक पैकेज-ईई’ परियोजना के अंतर्गत रामगढ़ एवं महलपुर बैराज और नवनैरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना से संबंधित है।
परियोजना के तहत गलवा पंप हाउस एवं गलवा बांध से बीसलपुर बांध (आरडी 9.6 केएम से 40.6 केएम) तक फीडर निर्माण कार्य से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के लिए यह जनसुनवाई थी। ये क्षेत्र टोंक जिले की देवली, दूनी और नगरफोर्ट तहसील के अंतर्गत आते हैं।
जनसुनवाई 3 जुलाई, 2026 को दोपहर 1:30 बजे ग्राम पंचायत भवन, चंदवाड़ में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य रूप से ठीकरियाकलां गांव के प्रस्तावित प्रभाव पर चर्चा की गई।
ठीकरियाकलां के पुरुष और महिला ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर नहर का विरोध किया। उन्होंने मुआवजे के बजाय उपजाऊ जमीन की मांग की और कहा कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे किसी भी कीमत पर नहर को अपनी जमीन से नहीं गुजरने देंगे।
मीटिंग में ईआरसीपी, पी.आई. यू. से अतिरिक्त जिला कलेक्टर भूपेंद्र कुमार यादव और उपमहाप्रबंधक अमित कुमार सेहरा अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्हें लिखित में सरकार तक पहुंचाने का वादा किया। उन्होंने ग्रामीणों को उनकी संपत्ति का उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन भी दिया।
विरोध दर्ज कराने वालों में किमत गुर्जर, रामनाथ गुर्जर, हरनाथ गुर्जर, रामफूल गुर्जर, बद्री गुर्जर, कजोड़ गुर्जर, संजय विजय, सीताराम विजय, दुर्गा शंकर शर्मा, कालूराम गोस्वामी, मदन लोहार, महेश लोहार, गीर्राज गोस्वामी और देवराज गोस्वामी सहित समस्त ग्राम ठीकरियाकलां के निवासी शामिल थे।
