अरबों रुपए से बन रहे एक्सप्रेस और हाईवे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन

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पहली बरसात भी नहीं सह पा रहे,आखिर भ्रष्टाचार की गंगा में कौन डुबकी लगा रहा है
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-*ओम माथुर*
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स्मार्ट हलचल।हमने रोड बनाने में स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है। स्पेस टेक्नोलॉजी से फोटोग्राफी और मॉनिटरिंग होती है। यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2017 में संसद में कही थी। इसके बाद नितिन गडकरी ने कहा था कि 2024 तक भारत में सड़कों का नेटवर्क अमेरिका जैसा हो जाएगा। लेकिन अब पहली बरसात के बाद ही जिस तरह देश भर से न सिर्फ आम सड़कों, बल्कि नए बने एक्सप्रेस वे-हाइवे तक टूटने की खबरें आ रही है,तो उसने न खाऊंगा ना खाने दूंगा का नारा देने वाले प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका जैसा नेटवर्क बनाने वाले गडकरी को सवालों के घेरे में ला दिया है। सड़कों की दुर्दशा में साबित कर दिया है कि सड़कों के साथ ही पुल,एयरपोर्ट जैसे अरबों रुपए के निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को किस तरह नजरअंदाज किया जा रहा है और भ्रष्टाचार की गंगा में कैसे गोते लगाए जाते हैं।
12,000 करोड़ की लागत से बने और ढाई महीने पहले दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उद्घाटन किया था। 2 दिन से सोशल मीडिया पर उसका जो वीडियो वायरल हो रहा है। वह बता रहा है कि इस पर कितने बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। यहां कई छोटे-मोटे हादसे हो चुके हैं और कहीं गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो रही है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर अंकलेश्वर के पास 8 फुट चौड़ा गड्ढा हो गया। पुल के एक्सपेंशन जॉइंट में भी छेद होने से इसकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं । इसी तरह सूरत में करोड़ों रुपए की लागत से बनी एक सड़क पहली बरसात में धंस गई। रीवा सतना हाईवे पर पतली लोहे की छड़ें डालने के कारण वह धंस गया। पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे भी पहली बरसात में धंसे थे। कल्पना की जा सकती है कि जिन सड़कों पर 100-125 की न्यूनतम रफ्तार से वाहन चलते हो,वहां इस तरह के गड्ढे और सड़कों का क्षतिग्रस्त होना लोगों की जान के लिए कितना बड़ा खतरा है। इस रफ्तार पर अगर कोई कर हादसा हो जाए तो किसी के बचने की संभावना शायद बिल्कुल भी ना हो। देश में पहले भी कुछ एयरपोर्ट पहली बरसात नहीं बर्दाश्त कर पाए और टपकने लगे थे। दिल्ली में भारत मंडपम की छत पहली बरसात में टपकने लगी थी
बड़ी सड़कों के प्रोजेक्ट पूरे करने की जिम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की है। जो सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन काम करता है।
फिलहाल इसके मंत्री नितिन गडकरी हैं। लेकिन जिस तरह से पहली बरसात में एक्सप्रेस-हाइवे बिखर रहे हैं। उससे ये साबित हो रहा है कि जितना बड़ा निर्माण कार्य है,देश में भ्रष्टाचार उतना ही बड़ा हो रहा है। हर बरसात में जब शहरों-कस्बों की सड़कें टूटती है तो कहा जाता है कि सरकारी महकमों, ठेकेदार की मिलीभगत से गुणवत्ताहीन काम कराया जाता है। लेकिन एक्सप्रेसवे और हाईवे अगर बारिश में इस तरह टूटने और बहने लगेंगे,तो फिर उंगली सीधी सरकारों पर उठने लगेगी।
सवाल ये है कि लोगों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर आखिर भ्रष्टाचार कि गंगा में कौन-कौन गोते लगा रहा है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। केवल अधिकारियों-ठेकेदारों के बस की ये बात नहीं है कि वह हजारों करोड़ रुपए की योजनाओं में इस तरह से लापरवाही बरते। क्या बिना राजनीतिक संरक्षण के ये संभव है। आमतौर पर इस तरह के मामलों में इंजीनियर और छोटे-मोटे स्टाफ को निलंबित कर ठेकेदारों को कुछ समय के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाता है। लेकिन उन बड़ी मछलियों का शिकार नहीं किया जाता है, जो वास्तव में इस भ्रष्टाचार की असली जड़ होते हैं। नितिन गडकरी को ईमानदार मंत्री के रूप में जाना जाता है। क्या सड़क परिवहन मंत्री होने के नाते उनकी जिम्मेदारी नहीं है कि वह गुणवत्तापूर्ण एक्सप्रेस वे,हाईवे के निर्माण पर निगरानी रखें। वैसे भी पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की मात्रा को लेकर गडकरी सवालों के घेरे में है। ऐसे में बारिश में सड़कों का टूटना उनकी और सरकार की छवि पर दोहरा आघात कर रहा है। आखिर डबल इंजन की सरकार में कमी कहां रह रही है। इसका खुलासा देश की जनता के सामने होना चाहिए। क्योंकि अधिकांश एक्सप्रेस और हाईवे उन राज्यों से गुजर रहे हैं जहां भाजपा की सरकारें है।केंद्र में तो भाजपा ने सरकार है ही।