गुरलां में स्वच्छता अभियान की अनदेखी: कचराघर बना सार्वजनिक शौचालय, महिला हिस्से पर सांठगांठ से कब्जा

भीलवाड़ा:-स्मार्ट हलचल।गुरला केंद्र व राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे स्वच्छ भारत मिशन को गुरलां ग्राम पंचायत में सरेआम पलीता लगाया जा रहा है। यहाँ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सार्वजनिक शौचालय और महिला स्नानागार (यूरिन) विभागीय अनदेखी के चलते आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। स्थानीय प्रशासन और हाईवे अथॉरिटी की घोर लापरवाही के कारण यह पूरा परिसर अब आमजन के उपयोग के लायक नहीं बचा है, जिससे सरकार की सफाई व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
*बीयर की बोतलें और गुटके के पाउच, स्वच्छता के दावों की खुली पोल*
शौचालय परिसर की स्थिति वर्तमान में बेहद नारकीय हो चुकी है। यह पूरी जगह कचरे से अटी पड़ी है। असामाजिक तत्वों द्वारा यहाँ धड़ल्ले से शराब का सेवन किया जा रहा है, जिसके कारण जगह-जगह बीयर की खाली बोतलें, गुटका और तंबाकू के पाउच बिखरे पड़े हैं। सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि प्रशासन केवल कागजों में स्वच्छता का ढिंढोरा पीट रहा है।

*महिला स्नानागार से उठती असहनीय बदबू, राहगीर परेशान*

इस बदहाली की सबसे बड़ी मार यहाँ से गुजरने वाली महिलाओं पर पड़ रही है। महिला स्नानागार में नियमित सफाई न होने और भारी गंदगी के कारण भयंकर बदबू आ रही है। हाईवे से गुजरने वाली राहगीर महिलाओं और स्थानीय महिलाओं के लिए इस स्नानागार का उपयोग करना तो दूर, इसके पास से निकलना भी दूभर हो गया है। बुनियादी सुविधाओं के इस अभाव से महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
*मिलीभगत का खेल: महिला हिस्से पर रसूखदारों का अवैध कब्जा*
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। यह पेशाबघर मूल रूप से दो हिस्सों में निर्मित किया गया था—एक पुरुषों के लिए और दूसरा महिलाओं के लिए। लेकिन ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ग्राम पंचायत की कथित अनदेखी या मिलीभगत के चलते इसके एक पूरे हिस्से (महिला विंग) पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया है। इस सरेआम हुए अतिक्रमण पर ग्राम पंचायत पूरी तरह आंखें मूंदे बैठी है, जो सीधे तौर पर अधिकारियों की सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
*ग्रामीणों में भारी रोष, आंदोलन की दी चेतावनी*
सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण और गंदगी के इस साम्राज्य ने स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस मामले की तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, अवैध कब्जे को मुक्त कराया जाए और परिसर की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो वे प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।