सुनील बाजपेई
कानपुर।स्मार्ट हलचल।जालसाजी समेत विभिन्न हथकंडों से लगभग 70 करोड़ का घोटाला करने वालों के खिलाफ आवाज लगातार बुलंद होती जा रही है ,जिसके तहत उनके खिलाफ विजिलेंस जांच की भी मांग की गई है। साथ ही सदस्यों को भी पत्र लिखकर एकजुट होने को कहा गया है ,ताकि वित्तीय जोखिम से बचा जा सके, घोटाले की रकम के हिसाब से संस्था के सदस्य होने के नाते इस वित्तीय जोखिम का खतरा हर व्यक्ति पर मडरा रहा है, जिसके तहत हर सदस्य को लगभग ₹6 लाख देने पड़ सकते हैं।
जानकारी के मुताबिक यह मामला भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड’ के क्रियाकलापों एवं संभावित वित्तीय जोखिम से जुड़ा हुआ है। इसी के बारे में सदस्यों को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड’ के नाम से चल रही इस संस्था के तथाकथित पदाधिकारियों पवन कुमार पांडे, सोमेश सिंह, अजीत कुमार सिंह, विजय कुमार गोयल, अनिल कुमार शुक्ला, आशीष कुमार पाठक आदि द्वारा सदस्यों को जो “लॉलीपॉप” दिखाकर संस्था से जोड़ा गया, वह वास्तव में एक सोची-समझी धोखाधड़ी का हिस्सा प्रतीत हो रही है।
इस आर्थिक भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार जुझारू संघर्ष में जुटे भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास निर्माण लिमिटेड, लखनऊ के गाज़ीपुर निवासी सदस्य
विश्वजीत यादव, पूर्व सदस्य सुवचन सरोज और राघवेंद्र कुमार सरावगी द्वारा लिखे गए पत्र के संदर्भ में दी गई जानकारी के मुताबिक संस्था पर लगभग 70 करोड़ रुपये की रिकवरी का संकट मंडरा रहा है। इसीलिए इस धोखाधड़ी के फलस्वरूप संस्था में सदस्य के रूप में सम्मिलित सभी लोग कानून की नजर में समान रूप से जिम्मेदार हो सकते हैं। इस हिसाब से 70 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में प्रत्येक सदस्य को दोषी ठहराकर उससे लगभग 6 लाख रुपये तक की वसूली निर्दोष होने के बाद भी की जा सकती है। जबकि सच्चाई यह है कि संस्था के नाम पर जमा की गई राशि का उपयोग उपरोक्त पदाधिकारियों द्वारा देहरादून, बेलसर, लखनऊ में लगभग 40 करोड़ की निजी संपत्ति खरीदने में भी किया गया है। आरोप यह भी लगाया गया है कि संस्था को फर्जी निगम बताकर पूर्ण रूप से गैर कानूनी तरीके से 6.5% चार्ज भी वसूला गया है।
लिखे गए पत्र में धोखाधड़ी करके लगभग 70 करोड़ का गबन करने वालों के खिलाफ कई एफ आई आर भी दर्ज होने का जिक्र करते हुए सभी सदस्यों से एक जुट होकर घोटाला करने वालों से हिसाब किताब मांगने की अपील भी की गई है, ताकि निर्दोष होने के बाद भी हर सदस्य आर्थिक हानि का शिकार ना हो सके।
पत्र में आरोप यह भी लगाया गया है कि करोड़ों का घोटाला करने वाले जिन पदाधिकारियों ने जिन लोगों को सदस्य बनाया, उन्होंने ही सभी सदस्यों को एक बड़े कानूनी संकट में धकेल दिया है। मतलब उन्हें इस संस्था का सदस्य बनने से कोई लाभ होना तो दूर उल्टे उनकी मेहनत की कमाई भी डकार ली गई। और अब करे कोई और भरे कोई वाली कहावत भी चरितार्थ होती नजर आ रही है। मतलब घोटाला किन लोगों ने किया है। यह सत्य सभी जानते हैं ,लेकिन उसकी भरपाई उन्हें भी करनी पड़ सकती है, जो संस्था में सदस्य के रूप में शामिल हैं। इसीलिए इस अन्याय, अत्याचार और शोषण के खिलाफ दोषियों को दंडित किए जाने तक संघर्ष को जनहित में भी आवश्यक बताते हुए सभी सदस्यों से एकजुट होने की जोरदार अपील भी की गई है।
